धनबाद।कोयला मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार एवं राजभाषा प्रभारी माणिक चन्द्र पंडित के नेतृत्व में अधिकारियों की एक टीम ने आज भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) मुख्यालय सहित कुसुंडा, गोविंदपुर, सिजुआ, ब्लॉक-2 एवं बरोरा क्षेत्रों के राजभाषा क्रियान्वयन का निरीक्षण किया। निरीक्षण दल में विशाल, सहायक निदेशक (राजभाषा), दिलीप कुमार सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक (राजभाषा) तथा शशिकांत भटनागर शामिल थे। इस अवसर पर बीसीसीएल प्रबंधन की ओर से निदेशक (मानव संसाधन) मुरली कृष्ण रमैया, महाप्रबंधक (राजभाषा) मनीष मिश्रा, उदयवीर सिंह, प्रबंधक (राजभाषा) सहित कोयला भवन मुख्यालय एवं विभिन्न क्षेत्रों के क्षेत्रीय प्रबंधक (मानव संसाधन) सहित नोडल राजभाषा अधिकारी और राजभाषा संवर्ग के कर्मचारी उपस्थित रहें।
टीम ने इस दौरान सीएमपीडीआईएल, धनबाद के राजभाषा क्रियान्वयन की भी समीक्षा की, जिसमें सीएमपीडीआईएल क्षेत्रीय कार्यालय-2 के क्षेत्रीय निदेशक एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। कोयला मंत्रालय की टीम द्वारा मुख्यालय एवं विभिन्न क्षेत्रों में राजभाषा के उपयोग, अभिलेखों के पत्राचार, आधिकारिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग तथा संबंधित प्रावधानों के अनुपालन की समग्र समीक्षा की गई। साथ ही राजभाषा के प्रभावी कार्यान्वयन को और सुदृढ़ बनाने हेतु आवश्यक सुझाव एवं मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया।
अपने संबोधन में माणिक चन्द्र पंडित ने कहा कि कोयला मंत्रालय द्वारा सभी अनुषंगी कंपनियों में राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नियमित रूप से इस प्रकार के निरीक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रालय का उद्देश्य केवल औपचारिक अनुपालना तक सीमित न रहकर राजभाषा हिंदी के व्यावहारिक एवं व्यापक उपयोग को प्रोत्साहित करना है, ताकि प्रशासनिक कार्यों में सरलता, पारदर्शिता एवं प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने बीसीसीएल में राजभाषा क्रियान्वयन के स्तर की सराहना करते हुए इसे उत्कृष्ट बताया तथा इस दिशा में निरंतरता बनाए रखने के साथ-साथ और अधिक सुदृढ़ प्रयास करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर निदेशक (मानव संसाधन) मुरली कृष्ण रमैया ने कहा कि बीसीसीएल राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है तथा संगठन के सभी स्तरों पर हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी की सरलता, सहजता एवं व्यापक स्वीकार्यता इसे प्रशासनिक कार्यों के लिए उपयुक्त बनाती है। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे अपने दैनिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को प्राथमिकता दें और राजभाषा के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाएं। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रबंधक (राजभाषा) उदयवीर सिंह ने किया गया।
