राउरकेला। सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) के सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग (एसईडी) और यातायात एवं कच्चा माल (टीएंडआरएम) विभाग द्वारा सेल सुरक्षा संगठन (एसएसओ) के सहयोग से आयोजित ‘रेल यातायात संचालन में सुरक्षा’ पर दो दिवसीय कार्यशाला 19 अगस्त, 2025 को आरएसपी के ज्ञानार्जन एवं बिकास केंद्र में आरंभ हुई। आरएसपी के निदेशक प्रभारी आलोक वर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की। मंच पर कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन), तरुण मिश्रा, कार्यपालक निदेशक (वर्क्स), बीआर पलाई, कार्यपालक निदेशक (सामग्री प्रबंधन), अनिल कुमार और कार्यपालक निदेशक (एसएसओ), अनूप कुमार भी उपस्थित थे। उद्घाटन सत्र में टाटा स्टील, जमशेदपुर के अधिकारियों के साथ-साथ आरएसपी और सेल की अन्य सहयोगी इकाइयों के कई मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी, मुख्य महाप्रबंधक, विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ अधिकारी, एवं सुरक्षा अधिकारी उपस्थित थे।
अपने संबोधन में श्री वर्मा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सभी सुरक्षा पहलों का सार ‘शून्य क्षति’ है और प्रत्येक गतिविधि इसी लक्ष्य की दिशा में काम करने की मानसिकता के साथ की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता इस्पात की मजबूती जितनी ही मज़बूत होनी चाहिए।” उन्होंने प्रतिभागियों से गहन विचार-विमर्श करने और ऐसे मापनीय परिणाम निकालने का आग्रह किया जिन्हें ज़मीनी स्तर पर लागू किया जा सके।
श्री अनूप कुमार ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि अनेक प्रशिक्षणों और पहलों के बावजूद, कई बार रुकावटें आती रहती हैं। यह बताते हुए कि दुर्घटनाओं को बाद में विश्लेषण करने के बजाय पहले ही रोका जाना चाहिए, उन्होंने सभी से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने किसी भी संकट के दौरान शीर्ष प्रबंधन के साथ खुलेपन और समय पर जानकारी साझा करने के महत्व पर भी ज़ोर दिया।
मुख्य महाप्रबंधक (टीआरएम), कौशिक सुनयानी ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन किया, जबकि सहायक प्रबंधक (एसईडी), सुश्री प्रज्ञा नाथ ने उद्घाटन समारोह का संचालन किया। बाद में, तकनीकी सत्रों में भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी), राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी), बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल), दुर्गापुर इस्पात संयंत्र (डीएसपी), इस्को इस्पात संयंत्र (आईएसपी) और टाटा स्टील, जमशेदपुर के प्रतिनिधियों द्वारा विस्तृत प्रस्तुतियाँ और बातचीत हुई। विचार-विमर्श में कपलिंग/डिकप्लिंग प्रक्रियाएँ, वैगन टिपलिंग क्षेत्रों में सुरक्षा प्रणालियाँ, लोको मूवमेंट प्रथाएँ और दुर्घटना निवारण उपायों सहित प्रमुख पहलुओं को शामिल किया गया। प्रमुख दुर्घटनाओं के केस स्टडी और उसके बाद की सुधारात्मक कार्रवाइयों पर भी चर्चा की गई।दिन के समापन सत्र में गहन चर्चा और विचार-विमर्श हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी अंतर्दृष्टि और अनुभव साझा किए, तथा सेल संयंत्रों में रेल यातायात परिचालन में साझा रणनीति विकसित करने और सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करने के लिए आधार तैयार किया।
