डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल को श्रद्धांजलि एवं व्याख्यानमाला का भव्य आयोजन, भारतीयता और वैश्य एकता पर हुआ मंथन

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मिर्जापुर।  जनपद स्थित सदर सिटी क्लब के प्रांगण में डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल चैरिटेबल ट्रस्ट, लखनऊ के तत्वावधान में भारत के महान इतिहासकार, पुरातत्त्वविद् एवं राष्ट्रचिंतक डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल की स्मृति में श्रद्धांजलि एवं व्याख्यानमाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ट्रस्ट के अध्यक्ष, अभियंता संघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अवकाशप्राप्त मुख्य अभियंता जी. पी. जायसवाल ने की, जबकि मंच संचालन ट्रस्ट के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष सिद्धांत जायसवाल ने किया। कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त रामाशंकर जायसवाल ने किया।

अपने उद्घाटन संबोधन में रामाशंकर जायसवाल ने कहा कि डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल ने अपने ऐतिहासिक शोध के आधार पर समुद्रगुप्त को “भारत का नेपोलियन” कहा था, जिसने भारतीय इतिहास की गौरवशाली परंपरा को विश्व के समक्ष स्थापित किया। मुख्य अतिथि एवं डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल की नतनी, विकास प्राधिकरण की पदाधिकारी डॉ. प्रीति जायसवाल ने कहा कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि यदि डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल स्वतंत्र भारत में जन्मे होते, तो वे निश्चित रूप से भारत के प्रथम राष्ट्रपति होते। यह उनके अद्वितीय ज्ञान, राष्ट्रभक्ति एवं व्यक्तित्व का सर्वोच्च सम्मान है।

मुख्य वक्ता राष्ट्रीय वैश्य न्याय महासंघ के राष्ट्रीय प्रधान संरक्षक डॉ. राजकुमार आज़ाद ने कहा कि हम सभी समुद्रगुप्त के वंशज हैं। हम जन्मजात गौरवशाली परंपरा के उत्तराधिकारी हैं, किन्तु समाज के कुछ जयचंदों के कारण आज हमारा समाज सम्मानजनक स्थिति से वंचित होकर कठिन जीवन जीने को विवश है। उन्होंने समाज से एकजुट होकर अपने गौरव की पुनर्स्थापना का आह्वान किया।

क्रांतिकारी वक्ता और सामाजिक क्रांति के लिए अपना पद न्यौछावर कर देने वाले पूर्व डिप्टी कलेक्टर एवं राष्ट्रीय वैश्य न्याय महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आदित्य शिवमशंकर गुप्ता ने कहा कि महान क्रांतिकारी विभूति डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल ने अपने शोध एवं लेखनी के माध्यम से भारत और भारतीयता के स्वर्णिम एवं महान इतिहास का साक्षात्कार विश्व तथा अंग्रेजों को कराया। उन्होंने कहा कि डॉ. जायसवाल के जीवन के दो प्रमुख लक्ष्य थे—पहला, भारत की राजनीतिक स्वतंत्रता, जो वर्ष 1947 में पूर्ण हुई; तथा दूसरा, भारत की सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत महानता की पुनर्स्थापना। उन्होंने आह्वान किया कि भारत के नेपोलियन समुद्रगुप्त के वंशज सभी वैश्य-बनिया एकजुट होकर वैश्य क्रांति का शंखनाद करें और भारतीयता के गौरव को पुनः विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करें। विशिष्ट अतिथि मिर्जापुर नगर परिषद के अध्यक्ष श्याम किशोर केशरी सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में ट्रस्ट के महामंत्री ई. के. के. जायसवाल, कोषाध्यक्ष राजकुमार गुप्त, जे. जे. जायसवाल, अधि अलंकार जायसवाल, दीपक कुमार जायसवाल, सुरेंद्र जायसवाल, डॉ. मंजू लता जायसवाल सहित अन्य पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों का पुष्पमालाओं एवं अंगवस्त्र (चादर) से सम्मान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक, शैक्षणिक एवं बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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