हास्य कवियों की रचनाओं से देर रात तक गूंजता रहा ठहाका,श्रोताओं ने तालियों से किया स्वागत

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ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित हुआ अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन, कई प्रदेशों के कवियों ने बांधा समां

चकिया। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के तत्वावधान में सोमवार की देर शाम उप जिलाधिकारी आवास परिसर में अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न प्रदेशों से पहुंचे नामचीन कवियों ने अपनी हास्य, व्यंग्य और ओजपूर्ण रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। कवियों की शानदार प्रस्तुतियों पर देर रात तक तालियां गूंजती रहीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि विधायक कैलाश आचार्य, पूर्व विधायक शिव तपस्या पासवान, चेयरमैन गौरव श्रीवास्तव, उप जिलाधिकारी विकास मित्तल, पुलिस क्षेत्राधिकारी अजीत सिंह चौहान, श्यामजी सिंह और तारकेश्वर सिंह ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलित करके किया।

कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे चंदौली के कवि डॉ. मनोज द्विवेदी मधुर ने सरस्वती वंदना के साथ काव्य संध्या को आगे बढ़ाया। वहीं वाराणसी के दमदार बनारसी ने अपने प्रभावशाली अंदाज में संचालन करते हुए पंडित चंद्रशेखर मिश्र की रचना प्रस्तुत की। उन्होंने ‘फूल लिखो कहीं, पान लिखो कहीं, गेहूं लिखो कहीं, धान लिखो रे… खेत लिखो, खलिहान लिखो रे… देश के जहां देखो टुकड़े, उसे जोड़कर हिंदुस्तान लिखो रे’ सुनाकर खूब तालियां बटोरीं।

लखनऊ की कवित्री अंकिता शुक्ला ने बेटी और पिता के रिश्ते को समर्पित रचना ‘चोट मुझको लगी, दर्द उसको हुआ, कैसा रिश्ता है बेटी और बाप का, मैं समझती हूं दुनिया में बस बाप है’ सुनाकर भावुक कर दिया। गाजियाबाद की कवित्री राधिका मित्तल ने मेरी आंखों में जिस दिन सिमट जाओगे क्या मिलेगा अगर तुम डट जाओगे मेरे और ज्यादा पीछे पड़ो ना मेरे सुना कर प्रेम और मोहब्बत पर आधारित अपनी रचना से श्रोताओं का ध्यान खींचा।

इटावा के हास्य कवि गौरव चौहान ने चकिया में पहली बार आने की खुशी को कविता के माध्यम से व्यक्त करते हुए कहा स्वरों में शौर्य के लेखन यहां उद्गार आया हूं यहां तक मैं कई नदियों को करके पार आया हूं, तुम अपनी तालियों के शौर्य से आशीष दे देना मैं चकिया की धारा पर पहली बार आया हूं। उनकी प्रस्तुति पर श्रोताओं ने तालियों से स्वागत किया। महाराष्ट्र के कवि चंदन राय ने युवाओं को शिक्षा के प्रति प्रेरित करते हुए कहा कि पढ़ाई बनारस या इलाहाबाद में करना, लेकिन किसी की याद में खुद को बर्बाद मत करना। वहीं मध्य प्रदेश के कवि अमित शुक्ला ने पुलिस और पत्नी को लेकर हास्य व्यंग्य सुनाकर लोगों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया।

इसके अलावा उत्तराखंड के मोहन मुंतजिर, चंदौली के डॉ. सुरेश अकेला और बाराबंकी के विकास बौखल ने भी अपनी रचनाओं से काव्य संध्या में चार चांद लगा दिए।

इस दौरान संयोजक मंडल के विनोद सिंह, रतीश कुमार मुसाफिर विश्वकर्मा, प्रदीप उपाध्याय, धर्मेंद्र जायसवाल, राहुल त्रिपाठी, गोविंद केसरी, मिथिलेश, राकेश केसरी चंद्रशेखर यादव और अंकित सैनी ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और शिक्षकों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम में रॉबर्ट्सगंज के सांसद छोटेलाल खरवार, जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह पूर्व विधायक जितेंद्र कुमार, पूर्व जिला अध्यक्ष अभिमन्यु सिंह, उमाशंकर सिंह, संदीप गुप्ता, राघवेंद्र प्रताप सिंह, नागेश पांडेय, अवनीश द्विवेदी, मीना विश्वकर्मा, आरती जायसवाल, पूजा जायसवाल, प्रमिला शुक्ला सहित बड़ी संख्या में नागरिक, पत्रकार और काव्य प्रेमी मौजूद रहे।

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