*आसनसोल,/ कोल इंडिया लिमिटेड की अनुषंगी कंपनी, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) ने अनुपयोगी खनन सामग्रियों को कलात्मक रूप से निर्मित एक सिंहासन का स्वरूप प्रदान किया है, जो विद्युत उत्पादन, औद्योगिक विकास और राष्ट्रीय प्रगति में कोयले के सतत एवं महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करते हुए भारत के ऊर्जा परिदृश्य में कोयले को प्रतीकात्मक रूप से ‘राजा’ के रूप में प्रस्तुत करता है।
स्पेशल कैंपेन 6 के अंतर्गत ईसीएल के सालानपुर क्षेत्र के कोयला कर्मियों द्वारा निर्मित इस सिंहासन को यहां सांकतोड़िया स्थित ईसीएल मुख्यालय के शहीद पार्क में स्थापित किया गया है। यह कलाकृति औद्योगिक विरासत और कलात्मक सृजनशीलता का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करती है तथा यह दर्शाती है कि नवाचार और कौशल के माध्यम से अनुपयोगी सामग्रियों को सार्थक एवं उपयोगी सृजन में परिवर्तित किया जा सकता है।
‘कोल – द किंग’ की अवधारणा भारत की अर्थव्यवस्था को ऊर्जा प्रदान करने में कोयले की महत्वपूर्ण भूमिका पर आधारित है। विद्युत उत्पादन के प्रमुख स्रोत तथा अनेक आधारभूत उद्योगों के लिए एक आवश्यक संसाधन के रूप में कोयला औद्योगिक उत्पादन, अवसंरचना विकास और देश की ऊर्जा सुरक्षा को निरंतर समर्थन प्रदान करता है। यह सिंहासन कोयले के इसी योगदान का प्रतीक है और साथ ही कोयला उत्पादन से जुड़े कार्यबल के समर्पण एवं तकनीकी दक्षता को भी सम्मान प्रदान करता है।
यह सृजन ईसीएल के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि कंपनी ऐतिहासिक रानीगंज कोयला क्षेत्र में कार्यरत है, जिसे भारत में वाणिज्यिक कोयला खनन की जन्मस्थली के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह पहल क्षेत्र की समृद्ध खनन विरासत को संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग, सृजनशीलता और पर्यावरणीय चेतना के समकालीन संदेश से जोड़ती है। यह पहल ईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक डॉ. सतीश झा के मार्गदर्शन में कंपनी की खदानों, कार्यशालाओं एवं प्रशासनिक प्रतिष्ठानों में संचालित स्पेशल कैंपेन 6 के सफल क्रियान्वयन का एक हिस्सा है। इस अभियान के अंतर्गत संगठन के कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी से स्वच्छता, स्थान के इष्टतम उपयोग, स्क्रैप के व्यवस्थित निपटान, अभिलेख प्रबंधन और प्रशासनिक दक्षता के क्षेत्र में उत्साहवर्धक परिणाम प्राप्त हुए हैं।
पारंपरिक स्वच्छता गतिविधियों से आगे बढ़ते हुए, इस अभियान ने अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में नवाचारी दृष्टिकोण को भी प्रोत्साहित किया है, जिसके तहत कर्मचारियों ने अनुपयोगी औद्योगिक घटकों को कलात्मक सृजन में परिवर्तित किया है। सालानपुर क्षेत्र द्वारा निर्मित यह सिंहासन इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि किस प्रकार इंजीनियरिंग कौशल, कल्पनाशीलता और शिल्पकला के माध्यम से औद्योगिक स्क्रैप को एक नई पहचान और उद्देश्य प्रदान किया जा सकता है। एक अन्य उल्लेखनीय पहल के तहत, ईसीएल की नियामतपुर केंद्रीय कार्यशाला के कर्मचारियों ने अनुपयोगी खनन मशीनरी के पुर्जों का उपयोग कर एक नौसैनिक युद्धपोत का मॉडल तैयार किया। भारतीय नौसेना को श्रद्धांजलि स्वरूप यह मॉडल 1 बंगाल एनसीसी नेवल यूनिट को भेंट किया गया, जो राष्ट्रीय सेवा की भावना तथा ईसीएल के कार्यबल की सृजनात्मक क्षमताओं को प्रतिबिंबित करता है।
इस प्रकार की पहल दर्शाती हैं कि स्पेशल कैंपेन 6 कर्मचारियों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने, कार्यस्थल पर सृजनात्मकता को पहचान प्रदान करने तथा नियमित परिचालन संबंधी दायित्वों से परे नवाचारी समाधानों को बढ़ावा देने के लिए एक प्रभावी मंच के रूप में उभरा है। ये पहल टीमवर्क, स्वामित्व की भावना और संगठनात्मक गौरव को सुदृढ़ करने में कर्मचारी-प्रेरित प्रयासों के प्रेरक महत्व को भी रेखांकित करती हैं।
ये सृजन 3आर – **रियूज, रिसाइकिल एवं रिपर्पज** – के सिद्धांत को साकार करते हैं और अनुपयोगी औद्योगिक सामग्रियों को सार्थक परिसंपत्तियों में परिवर्तित करने के साथ-साथ संसाधन संरक्षण, सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों तथा सतत अपशिष्ट प्रबंधन की पद्धतियों को बढ़ावा देते हैं। इन पहलों के माध्यम से ईसीएल ने विशेष अभियान 6 के उद्देश्यों को स्वच्छता और प्रशासनिक दक्षता से आगे बढ़ाते हुए नवाचार, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और सामूहिक भागीदारी की संस्कृति को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया है।
ईसीएल मुख्यालय में स्थापित यह सिंहासन इस दृष्टिकोण का एक विशिष्ट प्रतीक है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास में कोयले के योगदान का उत्सव मनाने के साथ-साथ इसके उत्पादन से जुड़े लोगों की प्रतिभा और सृजनशीलता को भी सम्मान प्रदान करता है। यह पहल इस संदेश को सुदृढ़ करती है कि औद्योगिक अपशिष्ट को सृजनशीलता और नवाचार के संसाधन में परिवर्तित किया जा सकता है तथा कार्यबल की सक्रिय भागीदारी से समर्थित सतत कार्यपद्धतियां संगठनात्मक उत्कृष्टता और राष्ट्रीय विकास में सार्थक योगदान दे सकती हैं।
