औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा कोई विकल्प नहीं, बल्कि प्राथमिकता होनी चाहिए – उपजिलाधिकारी उत्कर्ष द्विवेदी

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औद्योगिक दुर्घटनाओं जैसे आगजनी या रासायनिक रिसाव जैसी स्थितियों से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन प्रणाली को दुरुस्त किया जाए- डॉ. चारू द्विवेदी

डाला, सोनभद्र । औद्योगिक सुरक्षा को लेकर प्रशासन अब किसी भी तरह की लापरवाही के मूड में नहीं है। अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी, चोपन की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए उपजिलाधिकारी सदर उत्कर्ष द्विवेदी और क्षेत्राधिकारी नगर डॉ. चारू द्विवेदी ने खुद मोर्चा संभाला और कंपनी परिसर में सुरक्षा कर्मियों, प्रबंधकों व पुलिस अधिकारियों के साथ संयुक्त समन्वय बैठक कर कड़े निर्देश दिए। गोष्ठी की शुरुआत सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा से हुई, जिसमें उपजिलाधिकारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा कोई विकल्प नहीं, बल्कि प्राथमिकता होनी चाहिए।उन्होंने साफ किया कि सुरक्षा मानकों के पालन में किसी भी प्रकार की शिथिलता पूरी व्यवस्था पर भारी पड़ सकती है, इसलिए कंपनी को हर बिंदु पर चौकसी बरतनी होगी।सीसीटीवी निगरानी, इंट्री गेट्स की सुरक्षा, बाहरी व्यक्तियों की आवाजाही पर नियंत्रण, कैमरों की कार्यक्षमता और रिकॉर्डिंग की पुख्ता व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई। क्षेत्राधिकारी नगर ने कहा कि सुरक्षा गार्ड्स स्थानीय पुलिस के साथ नियमित संपर्क बनाए रखें और हर संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत एक्शन लें।उन्होंने कहा कि पुलिस और निजी सुरक्षा एजेंसियों के बीच सीधा और सक्रिय संचार सिस्टम तैयार किया जाए, ताकि आपातकालीन स्थितियों में मिनटों में कार्रवाई हो सके।गोष्ठी में यह भी तय हुआ कि कंपनी परिसर में मौजूद संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। औद्योगिक दुर्घटनाओं जैसे आगजनी या रासायनिक रिसाव जैसी स्थितियों से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन प्रणाली को दुरुस्त किया जाएगा। उपजिलाधिकारी ने आदेशित किया कि मॉक ड्रिल्स नियमित हों और फायर ब्रिगेड के साथ पूर्व समन्वय सुनिश्चित किया जाए।प्रशासन ने यह भी कहा कि अल्ट्राटेक कंपनी अपने कर्मचारियों और आसपास के नागरिकों के लिए सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाए और ग्रामीणों के साथ संवाद बनाकर रखे, जिससे समय रहते किसी भी आपराधिक या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिल सके। बैठक के अंत में उपजिलाधिकारी और क्षेत्राधिकारी ने सुरक्षा कर्मियों और कंपनी प्रबंधन से दो टूक शब्दों में कहा कि औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा केवल कंपनी तक सीमित नहीं, बल्कि आसपास के पूरे इलाके की सुरक्षा का सवाल है। इसमें कोई चूक पूरे जनपद के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है। इसलिए अब से हर कदम सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ उठाया जाए, प्रशासन हरसंभव सहयोग करेगा, लेकिन लापरवाही नहीं सहेगा।

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