एनएचआरसी के अध्यक्ष ने एचएनएलयू  के राष्ट्रीय एफडीपी में अकादमिक जगत से भविष्य-उन्मुख आईपी न्यायशास्त्र विकसित करने का आह्वान किया

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रायपुर, हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय(एच एन एल यू),रायपुर ने अपने डीपीआईआईटी–आईपीआर चेयर के तत्वावधान में आयोजित दस दिवसीय राष्ट्रीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम  (एफडीपी) “इमर्जिंग आईपी ज्यूरिसप्रूडेंस एंड इवॉल्विंग ट्रेंड्स ऑफ आईपी टीचिंग एंड रिसर्च” का सफलतापूर्वक समापन एक गरिमामय समापन सत्र के साथ किया।

समापन व्याख्यान  जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यम , अध्यक्ष, नैशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन द्वारा प्रदान किया गया। अपने संबोधन में न्यायमूर्ति रामासुब्रमण्यम ने इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ , मानवाधिकार और लोकहित के बीच विकसित होते संबंधों पर गहन विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने भारत में नवाचार को प्रोत्साहित करने में न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए नवाचार के साथ-साथ उसकी सुलभता और वहनीयता के संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने भविष्य-उन्मुख बौद्धिक संपदा न्यायशास्त्र के निर्माण में अकादमिक जगत की भूमिका के महत्व को भी उजागर किया।

सत्र का प्रारंभ कुलपति प्रो. वी. सी. विवेकानंदन के उद्घाटन वक्तव्य से हुआ, जिन्होंने न्यायमूर्ति रामासुब्रमण्यम का स्वागत करते हुए उनके साहित्यिक रुझानों का उल्लेख किया, जिसमें तमिल समाचार पत्रों में धारावाहिक लेखों के माध्यम से विज्ञान को लोकप्रिय बनाने में उनके योगदान शामिल हैं। कुलपति ने यह भी कहा कि न्यायपालिका और विधिक व्यवस्था नवाचार के प्रमुख सक्षमकर्ता के रूप में कार्य करती हैं और बौद्धिक संपदा मामलों के निपटान में तेजी से विस्तार हुआ है तथा विशेषीकृत आईपी न्यायालय शीघ्र ही वास्तविकता बनेंगे।

दस दिनों तक चले इस एफडीपी में देश भर से विभिन्न शैक्षणिक एवं व्यावसायिक पृष्ठभूमियों के 70 से अधिक प्राध्यापक गण, शोधार्थियों और प्रोफेशनल्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में 20 विशिष्ट संसाधन व्यक्तियों ने भाग लिया, जिनमें अग्रणी शिक्षाविद, विधि-व्यवसायी तथा नीति विशेषज्ञ शामिल थे। उन्होंने आईपी न्यायशास्त्र, समकालीन शिक्षण पद्धतियों तथा विकसित होते शोध प्रतिमानों से संबंधित प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया।

एफडीपी ने बौद्धिक आदान-प्रदान, सहयोगात्मक अधिगम तथा क्षमता निर्माण के लिए एक सशक्त मंच प्रदान किया। विभिन्न सत्रों में बौद्धिक संपदा के प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल नवाचार तथा वैश्विक नियामक ढाँचों के साथ उभरते अंतर्संबंधों का अध्ययन किया गया।

कार्यक्रम में योगदान देने वाले प्रमुख विशेषज्ञों में एंटनी टॉबमैन, बौद्धिक संपदा प्रभाग के निदेशक, वर्ल्ड ट्रेड आर्गेनाईजेशन प्रो. शक्तिवेल;रॉडनी राइडर;डॉ. गर्गी चक्रवर्ती;डॉ. राघवेंद्र; डॉ. अनिंद्य सिरकार; मधुसूदन; डॉ. क्रिस्टा रंटासारी; डॉ. वी. के. उन्नी;अजय गर्ग; जीशान खान; डॉ. पद्मावती तथा डॉ. भाविन कोठारी सहित अन्य शामिल थे।

कार्यक्रम का समापन डॉ. अंकित सिंह, कार्यक्रम निदेशक एवं आईपी चेयर प्रभारी द्वारा प्रस्तुत औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने मुख्य अतिथि, कुलपति, संसाधन व्यक्तियों तथा प्रतिभागियों के प्रति उनके अमूल्य योगदान के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया।

यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में अकादमिक उत्कृष्टता तथा व्यावहारिक दृष्टिकोण के समन्वय को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।

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