अध्यक्ष दिलीप संवाणी ने की इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरुकता महा अभियान की शुरुआत
इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर इस ऐतिहासिक अभियान का शुभारंभ किया
यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जायेगा -दिलीप संघाणी
नई दिल्ली। इफको भारत की सबसे बड़ी उर्वरक सहकारी संस्था, ने आज आधिकारिक रूप से इफको नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि यह एक व्यापक और एकीकृत राष्ट्रीय जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य भारतीय किसानों में नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देना है। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की प्रेरणा से शुरू किया गया है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘सहकार से समृद्धि’ जैसे राष्ट्रीय मिशनों के अनुरूप है। भारत के राजपत्र के उर्वरक नियंत्रण आदेश (एफसीओ) में नैनो एनपीके लिक्विड (8-8-10) और नैनो एनपीके ग्रेन्युलर (20-10-10) को शामिल किया जाना भारतीय कृषि नवाचार यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया गया, जो भारतीय सहकारिता के लिए गर्व का क्षण है।

उन्होंने आगे बताया कि कोयंबटूर स्थित इफको-नैनोर्वेशन्स में इफको का इनोवेशन हब तथा ब्राजील में स्थापित होने वाला नैनो उर्वरक उत्पादन संयंत्र जो जून 2026 तक शुरू होने की संभावना है कृषि क्षेत्र में नैनो तकनीक के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्धिक क्षमता का प्रतीक है। श्री संघाणी ने कहा कि भारत आज एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, जहां परंपरा और तकनीक का संगम हो रहा है, और यही संयोजन भारतीय कृषि को नई दिशा दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में. गठित सहकारिता मंत्रालय का संचालन देश के प्रथम सहकारिता मंत्री अमित शाह कर रहे हैं। ‘सहकार से समृद्धि’ का मंत्र इस अभियान की भावना को पूर्ण रूप से प्रतिबिंबित करता है और ‘आत्मनिर्भर भारत, आत्मनिर्भर कृषि’ के लक्ष्य को साकार करता है। श्री संघाणी ने नैनो उर्वरक क्रांति को भारतीय कृषि के लिए परिवर्तनकारी क्षण बताया। इस नैनो महा अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर जागरुकता और परिवर्तन अभियान के रूप में तैयार किया गया है, जिसके चार मुख्य उद्देश्य हैं- नैनो यूरिया प्लस, नैनो डीएपी, नैनो एनपीके, नैनो जिंक और नैनो कॉपर का व्यापक प्रचार, किसानों को मुख्य रूप से फोलियर स्प्रे के माध्यम से सही उपयोग का प्रशिक्षण देना, पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना, सहकारी नेटवर्क के माध्यम से अंतिम स्तर तक पहुंच सुनिश्चित करना।

उन्होंने कहा, “ग्राम स्तर पर जागरुकता अभियान, प्रत्येक पैक्स को मजबूत बनाकर और क्षेत्रीय प्रदर्शन के माध्यम से आगे बढ़ाना होगा। जब किसान स्वयं परिणाम देखेंगे, तब विश्वास स्वतः बढेगा।” अपने संबोधन के अंत में दिलीप संघाणी ने इस अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरक केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि भूमि और पर्यावरण की सुरक्षा तथा किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने कहा, “आइए हम सब मिलकर संकल्प लें कम लागत, अधिक उत्पादन और स्वस्थ पर्यावरण हर खेत में नैनो उर्वरक, यही नया भारत है, यही आत्मनिर्भर भारत है।” इफको ने 218 लाख से अधिक बोतल नैनो यूरिया प्लस लिक्विड और 64.26 लाख से अधिक बोतल नैनो डीएपी लिक्विड की बिक्री हासिल की है। नैनो जिंक और नैनो कॉपर उत्पादों को भी पहले वर्ष में क्रमशः 57 लाख और 2 लाख बोतलों की प्रभावशाली बिक्री प्राप्त हुई है।
यह उल्लेखनीय है कि नैनो यूरिया प्लस की 208.26 लाख बोतलें पारंपरिक यूरिया के 9.37 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, जबकि नैनो डीएपी की 57.89 लाख बोतलें डीएपी के 2.89 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, जिससे देश को लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और आयात लागत में भारी बचत हो रही है। इफको की नैनो उर्वरक श्रृंखला में नैनो यूरिया प्लस, नैनो डीएपी, नैनो एनपीके (लिक्विड और ग्रेन्युलर), नैनो जिंक, नैनो कॉपर और जैव-उत्तेजक ‘धरा अमृत’ शामिल हैं। ‘धरा अमृत’ जो अमीनो एसिड. एल्जिनिक एसिड, ह्यूमिक एसिड, आवश्यक खनिज और केले के रस से समृद्ध है लॉन्च के बाद से किसानों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इफको का कर-पूर्व लाभ आरएस4,200 करोड़ के ऐतिहासिक स्तर से अधिक रहने का अनुमान है। नैनो तकनीक,ड्रोन तकनीक, ऐ और डेटा विश्लेषण में निरंतर नवाचार के माध्यम से इफको भारत के कृषि-खाद्य क्षेत्र को रूपांतरित कर रहा है और ‘सहकार से समृद्धि’ के लक्ष्य को आगे बढ़ा रहा है। यह कार्यक्रम इफको सदन, नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसका उद्घाटन इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने किया। इस अवसर पर इफको के प्रबंध निदेशक के. जे. पटेल सहित निदेशक मंडल के सदस्य, अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
