नई दिल्ली, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (फियो) ने वित्त वर्ष 2025–26 में भारत के ज़बरदस्त विदेश व्यापार प्रदर्शन का स्वागत किया है। इस दौरान कुल निर्यात (वस्तु और सेवाएँ) 860.09 बिलियन डॉलर के अहम पड़ाव को पार कर गया, जो निर्यात क्षेत्र के लचीलेपन और प्रतिस्पर्धी क्षमता को दर्शाता है।
इस साल वस्तु का निर्यात 441.78 बिलियन डॉलर रहा, जबकि अकेले मार्च 2026 में कुल निर्यात 74.11 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया। वित्त वर्ष 2025–26 के लिए कुल आयात 979.40 बिलियन डॉलर दर्ज किया गया, जो मज़बूत घरेलू माँग और औद्योगिक गतिविधियों का संकेत है।
इस प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए, फियो के अध्यक्ष श्री एस. सी. रल्हन ने कहा: “खासकर वैश्विक अनिश्चितताओं, सप्लाई चेन में रुकावटों और माँग में उतार-चढ़ाव के बीच निर्यात में 860 बिलियन डॉलर का आँकड़ा पार करना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है । यह भारतीय निर्यातकों की अनुकूलन क्षमता और ताक़त को उजागर करता है।”
उन्होंने बताया कि निर्यात में बढ़ोतरी की वजह एक विविध बास्केट थी, जिसमें इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाएँ, रसायन, कपड़ा, रत्न और आभूषण, चावल और समुद्री उत्पाद शामिल थे, जिससे वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति और मज़बूत हुई है।
अमेरिका, यूएई, चीन, नीदरलैंड और ब्रिटेन निर्यात के मुख्य गंतव्य बने रहे। फियो ने बाज़ारों में और विविधता लाने और भारत की वैश्विक पहुँच का विस्तार करने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों का प्रभावी ढंग से लाभ उठाने की ज़रूरत पर बल दिया।
श्री रल्हन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार, लेन-देन की लागत में कमी और विशेष रूप से एमएसएमई के लिए सस्ती ऋण सुविधा सुनिश्चित करना—निर्यात की गति को बनाए रखने के लिए बेहद ज़रूरी होगा।
उन्होंने कहा, “लगातार नीतिगत समर्थन और व्यापार सुविधा के साथ, भारत वैश्विक व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और ‘विकसित भारत’ के विज़न के तहत एक अग्रणी निर्यात महाशक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।”
