एचएनएलयू ने “एचएनएलयू जेन ज़ी–लेक्स” का शुभारंभ किया : स्टैच्यूट से स्ट्रैटेजी तक

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रायपुर | हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचएनएलयू), रायपुर ने “एचएनएलयू जेन ज़ी–लेक्स” का शुभारंभ किया है—यह एक दूरदर्शी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है, जिसका उद्देश्य विधि शिक्षा (Legal Academia) और व्यावसायिक अभ्यास (Professional Practice) के बीच लंबे समय से महसूस किए जा रहे अंतर को पाटना है। एक उच्च-प्रभावी, नियमित सहभागिता मंच के रूप में परिकल्पित यह पहल विद्यार्थियों को स्टैच्यूट से स्ट्रैटेजी की ओर सहज रूप से ले जाने का प्रयास करती है, ताकि कक्षा-कक्ष की शिक्षा समकालीन विधिक अभ्यास की वास्तविकताओं से सुसंगत हो सके।

यह प्लेटफ़ॉर्म एचएनएलयू के विद्यार्थियों और अग्रणी विधि-व्यवसायियों, लॉ-फ़र्म पार्टनर्स तथा इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के बीच पखवाड़े में एक बार होने वाली संरचित संवादात्मक सहभागिताओं को सुगम बनाएगा। विशेषज्ञ-नेतृत्व वाले व्याख्यानों और संवादों के माध्यम से जेन ज़ी–लेक्स उभरते प्रैक्टिस एरियाज़, विकसित होते पेशेवर रुझानों और तेज़ी से बदलते विधिक इकोसिस्टम में करियर-रेडीनेस के लिए आवश्यक व्यावहारिक कौशलों पर केंद्रित रहेगा। इस प्लेटफ़ॉर्म का संचालन एचएनएलयू की इंटर्नशिप एंड रिक्रूटमेंट कोऑर्डिनेशन कमेटी (IRC) द्वारा किया जा रहा है, जो संरचित करियर डेवलपमेंट और पेशेवर एक्सपोज़र के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।

उद्घाटन सत्र
उद्घाटन सत्र “डिग्री से आगे: अगली पीढ़ी के वकीलों के लिए कौशल, माइंडसेट और करियर-रेडीनेस” विषय पर आयोजित किया गया, जिसे सुश्री समता थापा, को-फ़ाउंडर एवं पार्टनर, आग्रामी कंसल्टेंसी, मुंबई ने संबोधित किया। सत्र में विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही और पेशेवर तैयारी, अनुकूलनशीलता तथा विधि एवं संबद्ध क्षेत्रों में विकसित होते करियर पाथ्स पर समृद्ध संवाद हुआ। प्लेटफ़ॉर्म का शुभारंभ करते हुए प्रो. (डॉ.) वी. सी. विवेकानंदन, कुलपति, एचएनएलयू ने विधि शिक्षा की बदलती मांगों पर प्रकाश डालते हुए भविष्यवक्ता एल्विन टॉफलर के शब्द उद्धृत किए: “21वीं सदी का निरक्षर वह नहीं होगा जो पढ़-लिख न सके, बल्कि वह होगा जो सीखना, भूलना और फिर से सीखना न जानता हो।”
उन्होंने कहा कि विधि शिक्षा को केवल सिद्धांतात्मक ज्ञान तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों को एक गतिशील और तकनीक-प्रेरित पेशेवर संसार के लिए लॉ-रेडी बनाना चाहिए। उन्होंने एचएनएलयू जेन ज़ी–लेक्स को एक एकदिवसीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक पैडागॉजिक इंटरवेंशन बताया—कक्षा से कोर्टरूम तक, पेडागॉजी से प्रैक्टिस तक और थ्योरी से प्रोफेशनल ट्रांसफ़ॉर्मेशन तक की एक सुस्पष्ट यात्रा।

आमंत्रित वक्ता सुश्री समता थापा ने भर्ती प्रक्रियाओं के चरणों पर केंद्रित प्रस्तुति के माध्यम से जॉब-रेडीनेस के आवश्यक तत्वों पर प्रकाश डाला। उन्होंने रिक्रूटर्स की अपेक्षाओं की स्पष्ट समझ विकसित करने और उसी अनुरूप लक्षित प्रयास करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। साथ ही, उन्होंने जॉब इंटरव्यूज़ में उम्मीदवार के माइंडसेट की निर्णायक भूमिका पर चर्चा की, जो ज्ञान-सम्पदा से भी आगे जाकर चयन को प्रभावित करती है।

यह पहल फैकल्टी मार्गदर्शन में डॉ. अंकित अवस्थी और डॉ. मयंक श्रीवास्तव द्वारा परिकल्पित एवं क्रियान्वित की गई है और यह पखवाड़े में एक बार आयोजित होने वाली श्रृंखला के रूप में जारी रहेगी, जिसमें विधिक अभ्यास, नीति, कंसल्टिंग और संबद्ध क्षेत्रों के विविध पेशेवर सहभागिता करेंगे। कार्यक्रम में डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण दिया, डॉ. अंकित ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की, डॉ. मयंक ने धन्यवाद ज्ञापन दिया, तथा मंच संचालन सुश्री वान्या सिंह और सुश्री देवांशी तिवारी ने किया। जेन ज़ी–लेक्स के शुभारंभ के साथ, एचएनएलयू भविष्य-उन्मुख विधि शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट करता है—जो अगली पीढ़ी के वकीलों की आकांक्षाओं के प्रति उत्तरदायी और संवेदनशील है।

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