डब्ल्यूसीएल में फॉरेस्ट क्लीयरेंस केवल औपचारिकता नहीं बल्कि प्रकृति के साथ उत्तरदायी सह-अस्तित्व का संकल्प है – जे. पी. द्विवेदी

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डब्ल्यूसीएल द्वारा “कोयला खनन में संसाधन नियोजन हेतु फॉरेस्ट क्लीयरेंस की महत्ता” विषय पर कार्यशाला आयोजित*

नागपुर,। वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) द्वारा आज “कोयला खनन में संसाधन नियोजन हेतु फॉरेस्ट क्लीयरेंस की महत्ता” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य कोयला खनन में फॉरेस्ट क्लीयरेंस अनुपालन को सुदृढ़ बनाना एवं खनन क्षेत्र में सतत विकास को प्रोत्साहित करना रहा।

इस कार्यशाला के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता डब्ल्यूसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक  जे. पी. द्विवेदी ने की। इस अवसर पर निदेशक (तकनीकी) संचालन  अनिल कुमार सिंह, निदेशक (वित्त)  बिक्रम घोष, मुख्य सतर्कता अधिकारी  अजय मधुकर म्हेत्रे, महाराष्ट्र शासन के नोडल अधिकारी तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) के वरिष्ठ अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

अपने अध्यक्षीय भाषण में  जे. पी. द्विवेदी ने कहा कि डब्ल्यूसीएल में फॉरेस्ट क्लीयरेंस केवल औपचारिकता नहीं बल्कि प्रकृति के साथ उत्तरदायी सह-अस्तित्व का संकल्प हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के प्रति डब्ल्यूसीएल की प्रतिबद्धता पर बल देते हुए कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को नियामक परिदृश्यों में कुशलतापूर्वक कार्य करने की जानकारी प्राप्त होगी जिससे वे वनों के संरक्षण की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा सकेंगे। 

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में स्वागत भाषण डब्ल्यूसीएल के निदेशक (तकनीकी) संचालन  श्री अनिल कुमार सिंह ने तथा धन्यवाद ज्ञापन महाप्रबंधक (फॉरेस्ट) डॉ. एस. के. जेना ने प्रस्तुत किया। कार्यशाला में कोयला खदानों से संबंधित नीतिगत मुद्दे, खनन कार्य के लिए वन विभाग से मंजूरी प्राप्त करने की प्रक्रिया, कोयला खनन में लीनियर डायवर्सन प्रपोजल आदि विषयों पर सत्र आयोजित किए गए।

डब्ल्यूसीएल के वन विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में नीति निर्माताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों ने फॉरेस्ट क्लीयरेंस प्रक्रियाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। कार्यशाला में नियामक विकास, प्रक्रिया दक्षता एवं पर्यावरण अनुकूल खनन पर विशेष बल दिया गया।

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