आईसीएआर-सीएएफटी द्वारा समर्थित प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत संकाय सदस्यों ने किया आइसार्क का दौरा

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  वाराणसी। अंतर्राष्ट्रीय धान अनुसंधान केंद्र, दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आइसार्क), वाराणसी, ने इक्कीस दिवसीय दिनांक 17 फरवरी 2025 से 9 मार्च 2025 तक  प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत देश भर के विभिन्न संस्थानों के 19 संकाय सदस्यों के लिए एक दिवसीय परिचयात्मक दौरे का आयोजन किया। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – उन्नत संकाय प्रशिक्षण केंद्र (आईसीएआर-सीएएफटी) द्वारा दुग्ध विज्ञान और खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग, कृषि विज्ञान संस्थान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के द्वारा समर्थित था। यह दौरा  “खाद्य एवं दुग्ध अवशेष में नवाचार एवं सतत मूल्यांकन रणनीतियाँ” पर केन्द्रित था।

आइसार्क के वैज्ञानिक डॉ. सौरभ बडोनी ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और चावल के दाने की गुणवत्ता और उसके मूल्यवर्धन के विभिन्न पहलुओं पर व्याख्यान दिया। डॉ. सौरभ ने चावल आधारित विभिन्न उत्पादों के विकास पर भी चर्चा की और बताया कि चावल का मूल्यवर्धन विभिन्न हितधारकों के माध्यम से समाज के लिए फायदेमंद होगा। 

इस दौरे में संस्थान ने नवाचारी और अग्रणी अनुसंधान को प्रदर्शित किया, जिसमें चावल के दाने की गुणवत्ता, जलवायु-सहनशील चावल नवाचार, चावल आधारित उत्पादों का विकास, चावल की खेती में भौगोलिक सूचना प्रणाली का उपयोग और कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी की भूमिका शामिल थी। प्रतिभागियों ने उन्नत कृषि अनुसंधान, ज्ञान आदान-प्रदान, और खाद्य सुरक्षा एवं जलवायु सहनशीलता को मजबूत करने के लिए भविष्य के सहयोग एवं अवसरों पर चर्चाएं कीं। इस दौरे का समापन एक पारस्परिक संवाद सत्र के साथ हुआ, जिसमें आइसार्क की क्षमता निर्माण में भूमिका और चावल की सतत खेती के लिए साझेदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

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