मनोज पाण्डेय
प्रयागराज / उच्च न्यायालय इलाहाबाद में हुए बार के चुनाव में आज कुछ पदों के परिणाम घोषित हुए जिसमें कड़ी टक्कर और संघर्षों के मध्य सीपी उपाध्याय अध्यक्ष और महासचिव के पद पर संतोष कुमार मिश्र को शानदार जीत हासिल हुई इसको लेकर शुभेच्छुओं और समर्थकों में खुशी की लहर देखने को मिली किंतु इस चुनाव में अध्यक्ष पद को लेकर शुरू से ही जीत हार में सस्पेंस और संघर्ष बना रहा और खुलकर अधिवक्ताओं से जीत को लेकर सुनने को कम मिला हालांकि कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं का ऐसा मानना रहा कि अध्यक्ष पद पर सीपी उपाध्याय को जीतना चाहिए जिसका परिणाम सामने है डाक्टर सीपी उपाध्याय सहज सरल कर्तव्यनिष्ठ संस्कारवान एवं योग्य अधिवक्ता के रूप में जाने जाते रहे हैं वहीं दूसरी ओर संतोष मिश्र शुरू से ही महासचिव के रूप में अपने प्रतिद्वंदियों पर अच्छी खासी बढ़त बनाते हुए शानदार जीत हासिल किए खैर चुनाव में जीत हार एक क्रम है जो हमेशा से देखने को मिलता रहता है किन्तु सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जो हाईकोर्ट सदैव से आम जनमानस में न्यायिक परंपरा की रीढ़ मानी जाती रही है ऐसे में विगत कुछ वर्षों से रजिस्ट्रेशन वाले अधिवक्ताओं जो अधिवक्ता संगठन का गलत इस्तेमाल कर समाज और संगठन दोनों को निरंतर नुकसान पहुंचाने और ऐसे न्यायिक पीठ और पीठाधीश्वरों के प्रति जनता में अविश्वास पैदा कर रहे हैं क्या इस व्यवस्था को रोकने या इसपर चिंतन करने में सफल होंगे अथवा पद और वोट की चाह में मौन रहेंगे अच्छे अधिवक्ता की जीत से आम जनता को भी सुकून और खुशी मिलती है
