रांची । नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (उपक्रम), राँची की बैठक का आयोजन सीएमपीडीआई के निदेशक (तकनीकी/सीआरडी) शंकर नागाचारी की अध्यक्षता में किया गया । इस अवसर पर संजय कडम्बार, सदस्य सचिव नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (उपक्रम), राँची तथा पर्यवेक्षक डॉ0 विचित्रसेन गुप्त, उप निदेशक , पूर्व क्षेत्र, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय सहित राँची शहर स्थित लगभग 28 पीएसयू के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय संबोधन में नागाचारी ने कहा कि नराकास की परिकल्पना एक ऐसे संयुक्त मंच के रूप में की गई है जहाँ आपसी विचार-विमर्श से राजभाषा कार्यान्वयन को गति दी जा सके और इसकी प्रगति के मार्ग में आने वाली बाधाओं को पारस्परिक प्रयासों से दूर किया जा सके। इसी बुनियादी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सीएमपीडीआई द्वारा नराकास की विविध गतिविधियों का आयोजन किया जाता रहा है। इन सभी गतिविधियों में सदस्य कार्यालयों की सहभागिता रहती है जो निश्चित तौर पर प्रशंसनीय है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नराकास की पिछली बैठक में मूल पत्राचार की प्रतिशतता कम से कम 85% और टिप्पणियों की प्रतिशतता 70% तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। अधिकांश कार्यालयों ने इस लक्ष्य को प्राप्त किया है, जो कार्यालय अभी इस लक्ष्य तक नहीं पहुंचे हैं उम्मीद है कि नराकास की आगामी बैठक से पूर्व इस लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे। पिछली दो तिमाहियों की राजभाषा प्रगति रिपोर्ट में यह देखने में आया है कि कुछ कार्यालयों में राजभाषा अधिनियम की धारा 3(3) के अंतर्गत शत-प्रतिशत कागजात द्विभाषी जारी नहीं किए गए हैं। इस बात का हमें खासा ध्यान रखना है कि धारा 3(3) के अंतर्गत शत-प्रतिशत कागजात द्विभाषी जारी होने चाहिए। विदित हो कि वर्ष 2018 से नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (उपक्रम), राँची की अध्यक्षता का दायित्व सीएमपीडीआई के पास है. कुल 35 पीएसयू इसके सदस्य हैं।
