लोकसभा अध्यक्ष ने किया कबीर स्मृति भवन का शिलान्यास, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य बोले; डबल इंजन सरकार में विकास को मिली गति
लखनऊ। संतों की वाणी समाज में समरसता, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को मजबूत करती है। संत कबीर साहब की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं और समाज को समानता एवं विवेक का संदेश देती हैं। यह बात लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को लखीमपुर खीरी में संत श्री असंगदेव जी महाराज के 60वें अवतरण दिवस पर आयोजित कबीर महोत्सव एवं कबीर स्मृति भवन के भूमि पूजन समारोह में कही। उन्होंने कबीर स्मृति भवन का शिलान्यास कर संत परंपरा के सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान की सराहना की।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संत कबीर साहब ने अपनी निर्भीक वाणी के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों, पाखंड और जातिगत भेदभाव पर प्रहार किया। उनकी शिक्षाएं समानता, विवेक और मानवीय मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देती हैं। लोकतंत्र में विचारों की भिन्नता स्वाभाविक है, लेकिन सहमति और असहमति दोनों का सम्मान जरूरी है। कबीर की वाणी संयम, मर्यादा और विवेक के साथ अपनी बात रखने का संदेश देती है। उन्होंने संत श्री असंगदेव जी महाराज के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि संतों का सान्निध्य व्यक्ति को नैतिकता और संयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। गांव-गांव तक कबीर साहब के विचारों और जीवन दर्शन को पहुंचाने का कार्य समाज में सकारात्मक बदलाव का आधार है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। केंद्र और प्रदेश की डबल इंजन सरकार सबका साथ, सबका विकास के संकल्प के साथ बिना भेदभाव जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचा रही है। वर्ष 2014 से पहले के भारत और 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश की तुलना में आज विकास और सुशासन की तस्वीर बदली है।
जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रत देव सिंह कहा कि सरकारी जमीन, नाली और पोखरों पर कब्जा करने के बजाय बच्चों की शिक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य पर ध्यान देना चाहिए। समारोह में प्रदेश सरकार के मंत्री एवं प्रभारी मंत्री नितिन अग्रवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र टेनी, विधायक योगेश वर्मा, विनोद शंकर अवस्थी, शशांक वर्मा, अमन गिरी, रोमी साहनी, भाजपा जिलाध्यक्ष अरविंद गुप्ता सहित विभिन्न राज्यों से आए संत-महात्मा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन भारत माता की जय और जय श्रीराम के उद्घोष के साथ हुआ।
