पहाड़ी पर तिरपाल के नीचे कट रही 75 वर्षीय वृद्ध आदिवासी की रातें
दुद्धी,सोनभद्र। कनहर सिंचाई परियोजना के डूब क्षेत्र में लापरवाही और संवेदनहीनता का एक दर्दनाक मामला सामने आया है। तहसील दुद्धी के अंतर्गत ग्राम सुन्दरी निवासी 75 वर्षीय वृद्ध आदिवासी शिवप्रसाद (पुत्र स्वर्गीय बंशीधर) का पुश्तैनी आशियाना परियोजना के पानी में पूरी तरह जलमग्न हो चुका है, लेकिन राजस्व विभाग के क्षेत्रीय लेखपाल और संबंधित अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण उन्हें आज तक विस्थापित पैकेज की राशि नहीं मिल सकी है। न्याय न मिलने से परेशान पीड़ित ने अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर अपनी जिंदगी बचाने और पुनर्वास की गुहार लगाई है।
मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में पीड़ित शिवप्रसाद ने बताया कि वे एक अत्यंत गरीब आदिवासी परिवार से हैं, जिनका गुजारा सिर्फ खेती-किसानी पर निर्भर था। कनहर परियोजना के डूब क्षेत्र में आने के कारण उनकी जमीन और मकान दोनों पानी में समा चुके हैं। नियम के मुताबिक उन्हें तत्काल विस्थापित पैकेज की राशि मिलनी चाहिए थी ताकि वे दूसरी जगह भूमि खरीदकर नया मकान बना सकें, लेकिन अधिकारियों की हीलाहवाली के कारण उन्हें आज तक एक भी रुपया नहीं मिला है। मकान डूबने और पास में फूटी कौड़ी न होने के कारण पीड़ित वृद्ध अपने पूरे परिवार के साथ डूब क्षेत्र के पास ही स्थित एक पहाड़ी पर प्लास्टिक (तिरपाल) तानकर रहने को मजबूर हैं। पीड़ित ने पत्र में दर्द बयां करते हुए लिखा है कि बरसात के दिनों में बाढ़ आने पर उनके डूबने का खतरा बना रहता है। वे हर रात डर-डर कर गुजार रहे हैं और उनका पूरा परिवार इस समय बेहद चिंतित है।
पीड़ित का आरोप है कि उन्होंने अपनी इस पीड़ा को लेकर जिलाधिकारी सोनभद्र, सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों के दफ्तरों के कई चक्कर काटे और बार-बार प्रार्थना पत्र दिए। इसके बावजूद किसी भी विभाग के अधिकारी ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। अधिकारियों की इस अनदेखी के कारण अब यह आदिवासी परिवार पशुओं जैसी जिंदगी जीने को मजबूर है। पीड़ित ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस मामले का तुरंत संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी सोनभद्र को विस्थापित पैकेज राशि दिलाने के निर्देश जारी किए जाएं ताकि उनकी जान-माल की रक्षा हो सके।एसडीएम अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि मूल सूचि में नाम होने के कारण समस्या आ रही हैं,मूल सूचि में नाम होने का क्या कारण हैं इसकी जाँच क्षेत्रीय लेखपाल से करायी जा रही हैं।
