61 वर्षों की गौरवशाली परंपरा के साथ संपन्न हुई हिंडालको रामलीला, 90 फीट ऊंचे रावण के पुतले के दहन से गूंज उठा रेणुकूट

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रेणुकूट। हिंडाल्को रामलीला परिषद, रेणुकूट द्वारा आयोजित 61 वें भव्य रामलीला महोत्सव का समापन मंगलवार को बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक भव्य रावण दहन के साथ श्रद्धा, उल्लास और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। रामलीला के नवम दिवस पर रामायण के सबसे रोमांचकारी प्रसंगों मेघनाद वध, कुंभकर्ण वध, अहिरावण वध एवं रावण वध का प्रभावशाली मंचन किया गया, वहीं समापन अवसर पर 90 फीट ऊंचे रावण के विशाल पुतले के दहन ने पूरे हिंडालको परिसर को जय श्रीराम के जयकारों से गुंजायमान कर दिया।

इस अवसर पर अतिथि के रूप में हिण्डाल्को रेणुकूट के क्लस्टर एचआर हेड-  जसबीर सिंह, सोनभद्र के एडीएम  वागीश शुक्ला, एसडीएस  अशोक गुप्ता, जिला जज अररिया बिहार-  प्रमोद यादव, एचआर हेड  अजय सिन्हा, स्मेल्टर हेड  जयेश पवार व अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। रामलीला मंचन के उपरांत विशाल रावण दहन का आयोजन किया गया। जैसे ही 90 फीट ऊंचे रावण के पुतले में अग्निबाण लगाया गया, पूरा रामलीला मैदान “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा। हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक क्षण का उत्साहपूर्वक साक्षी बनकर भगवान श्रीराम की जय-जयकार की। हिंडालको आवासीय परिसर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग आयोजन में पहुंचे।

जसबीर सिंह ने इस अवसर पर विशाल जनसमूह को सम्बोधित करते हुए दशहरे के महत्व को बताया साथ ही कहा कि उत्साह के बीच हमें सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं करना है। सेफ्टी हमारे नियमित दिनचर्या का हिस्सा होनी चाहिए। सुरक्षित कार्यस्थल पर पहुंच कर सुरक्षित वापसी ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है। इसके साथ ही वागीश शुक्ला, एवं प्रमोद यादव, अशोक गुप्ता ने उपस्थित सभी को सम्बोधित करते हुए इस पावन अवसर पर अपने अंदर की बुराई को समाप्त कर अच्छाई अपनाने एवं श्री राम के चरित्र को आत्मसात करने पर जोर दिया।

रावण दहन के पश्चात बाहर से आए आतिशबाजों द्वारा प्रस्तुत आकर्षक आतिशबाजी ने कार्यक्रम की भव्यता में चार चांद लगा दिए। पूरा मैदान तालियों और जयघोषों से देर तक गूंजता रहा तथा लोगों ने इस भव्य आयोजन की यादों को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया।गौरतलब है कि हिंडाल्को रामलीला परिषद, रेणुकूट द्वारा आयोजित यह रामलीला महोत्सव क्षेत्र की सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। पिछले 61 वर्षों से परिषद भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, सत्य एवं धर्म के संदेश को रामलीला मंचन के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रही है। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंजेजामात रहे।

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