एनटीपीसी सिंगरौली में विजयादशमी का भव्य आयोजन, हजारों लोगों ने लिया सहभागिता

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शक्तिनगर। एनटीपीसी सिंगरौली परिसर स्थित केंद्रीय विद्यालय मैदान में विजयादशमी के पावन अवसर पर दशहरा उत्सव श्रद्धा, उल्लास एवं पारंपरिक गरिमा के साथ आयोजित किया गया। हजारों की संख्या में आसपास के ग्रामवासियों, एनटीपीसी कर्मियों एवं उनके परिजनों की उपस्थिति में बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक रावण के साथ मेघनाद एवं कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया गया। आयोजन के दौरान पुलिस प्रशासन, सीआईएसएफ, निजी सुरक्षा कर्मी एवं एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं।

दशहरा उत्सव का शुभारंभ भगवान श्रीराम की शोभायात्रा के साथ हुआ। इसके उपरांत सेंट जोसेफ विद्यालय के बच्चों द्वारा श्रीराम एवं रावण की सेनाओं के बीच युद्ध का जीवंत मंचन किया गया। रामलीला के प्रसंगों की प्रस्तुति के बाद परंपरागत रूप से रावण, मेघनाद एवं कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया गया। इस अवसर पर आयोजित विशेष आतिशबाजी ने उत्सव को और आकर्षक बनाया।

इस अवसर पर  ई. प्रभाकर राव, परियोजना प्रमुख एवं कार्यकारी निदेशक, एनटीपीसी सिंगरौली ने विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा, “दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सत्य, धर्म और नैतिक मूल्यों की विजय का प्रतीक है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन हमें अपनी परंपराओं से जोड़ने के साथ सामाजिक एकता, सद्भाव और आपसी सौहार्द को भी सुदृढ़ करते हैं।”उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाली श्री रामलीला समिति तथा सभी सहयोगी संस्थाओं एवं सहभागियों के प्रयासों की सराहना की।

कार्यक्रम में श्रीमती ई. निर्मला राव, अध्यक्षा, वनिता समाज; अगम प्रकाश तिवारी, महाप्रबंधक (प्रचालन एवं अनुरक्षण); सुनील कुमार मिश्रा, महाप्रबंधक (अभियांत्रिकी); सिद्धार्थ मंडल, मानव संसाधन प्रमुख सहित सीआईएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी, एनटीपीसी सिंगरौली के वरिष्ठ अधिकारीगण, वनिता समाज की सदस्याएं, यूनियन एवं एसोसिएशन के प्रतिनिधिगण, कर्मचारी एवं उनके परिजन उपस्थित रहे। आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं ने उत्सव में सहभागिता की।

हजारों लोगों की सामूहिक उपस्थिति में आयोजित विजयादशमी उत्सव ने सत्य की विजय, सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और सामुदायिक एकजुटता का सशक्त संदेश दिया। श्रीराम की शोभायात्रा से लेकर पुतला दहन और आकर्षक आतिशबाजी तक, पूरे आयोजन ने शक्तिनगर परिसर को उत्सव और भक्तिभाव से सराबोर कर दिया।

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