एक माह में 3,735 जल नमूनों की जांच कर पेयजल गुणवत्ता की हुई सतत निगरानी
प्रयागराज। यात्रियों को स्वच्छ, सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी क्रम में मंडल के विभिन्न रेलवे स्टेशनों एवं रेलवे परिसरों में उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल की नियमित जांच एवं सतत निगरानी की जा रही है। यात्रियों के स्वास्थ्य एवं सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रयागराज मंडल द्वारा संचालित जल गुणवत्ता निगरानी अभियान के अंतर्गत एक माह में कुल 3,735 जल नमूनों की जांच की गई। इनमें 3,447 अवशिष्ट क्लोरीन (Residual Chlorine), 280 बैक्टीरियोलॉजिकल तथा 8 केमिकल एनालिसिस के नमूने शामिल हैं।
अवशिष्ट क्लोरीन की जांच के माध्यम से पेयजल में क्लोरीनीकरण की स्थिति की निगरानी की जाती है। वहीं, बैक्टीरियोलॉजिकल जांच से जल की सूक्ष्मजीव संबंधी गुणवत्ता तथा केमिकल एनालिसिस के माध्यम से जल के महत्वपूर्ण रासायनिक मानकों की जांच की जाती है। इन जांचों का उद्देश्य यात्रियों को उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मंडल के विभिन्न स्टेशनों पर स्थित पेयजल नलों, वाटर कूलरों, जल भंडारण टंकियों एवं अन्य पेयजल स्रोतों की नियमित जांच एवं निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही जल भंडारण टंकियों की निर्धारित समय पर सफाई, पेयजल स्थलों के आसपास स्वच्छता तथा जलापूर्ति व्यवस्था के समुचित रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
जांच के दौरान निर्धारित गुणवत्ता मानकों में किसी प्रकार की कमी पाए जाने पर संबंधित विभागों के समन्वय से आवश्यक सुधारात्मक एवं निवारक कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है, ताकि यात्रियों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। मंडल रेल प्रबंधक/प्रयागराज रजनीश अग्रवाल ने कहा कि यात्रियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना मंडल की प्राथमिक जिम्मेदारियों में से एक है। पेयजल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित जांच एवं सतत निगरानी की प्रभावी व्यवस्था की गई है तथा इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो, यह सुनिश्चित किया जा रहा है।
