‘सोन संगम की काव्य-संध्या में साहित्य, संवेदना और लोकभाषाओं के रंग
शक्तिनगर, सोनभद्र। साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था सोन संगम के तत्वावधान में अवधी एवं हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि स्व. डॉ. शालिग्राम शर्मा की जयंती के उपलक्ष्य में विद्युत विहार आवासीय परिसर, शक्तिनगर में बुधवार, 09 सितम्बर 2026 की शाम सम्मान समारोह एवं काव्य-संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एआरएम, विंध्यनगर डिपो नागेन्द्र पाण्डेय रहे, जबकि अध्यक्षता सोनभद्र के लब्धप्रतिष्ठित लोककवि जगदीश पंथी ने की। अवधूत भगवान राम महाविद्यालय, अनपरा के प्राचार्य डॉ. अजय विक्रम विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

इस अवसर पर एनटीपीसी शक्तिनगर के उप महाप्रबंधक (मानव संसाधन–राजभाषा) एवं प्रख्यात कवि डॉ. ओम प्रकाश को हिंदी भाषा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए संस्था के सातवें ‘माटी महकी सम्मान–2026’ से सम्मानित किया गया। सम्मान के माध्यम से संस्था ने हिंदी साहित्य और मानवीय संवेदनाओं को समर्पित उनकी रचनात्मक यात्रा को रेखांकित किया।
उल्लेखनीय है कि यह प्रतिष्ठित सम्मान स्व. डॉ. शालिग्राम शर्मा की स्मृति में अनेक वर्षों से प्रदान किया जा रहा है। इससे पूर्व हरिहर प्रसाद विश्वकर्मा, जगदीश पंथी, माहिर मिर्जापुरी, अजय चतुर्वेदी कक्का, गोपाल तिवारी एवं शिवशंकर मिश्र सरस इस सम्मान से अलंकृत किए जा चुके हैं।
कार्यक्रम का आरंभ स्व. डॉ. शालिग्राम शर्मा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। तत्पश्चात सतीश सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अतिथियों का स्वागत चन्द्रशेखर जोशी ने किया। डॉ. शर्मा के पुत्र डॉ. योगेन्द्र मिश्र ने उनकी प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ कर उनकी साहित्यिक स्मृतियों को जीवंत किया। मुख्य अतिथि नागेन्द्र पाण्डेय एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जगदीश पंथी ने संस्था के इस प्रयास की सराहना करते हुए डॉ. ओम प्रकाश को ‘माटी महकी सम्मान–2026’ से अलंकृत किए जाने पर शुभकामनाएँ दीं।
सम्मान समारोह के बाद आयोजित काव्य-संध्या में संवेदना, प्रेम, पारिवारिक रिश्तों और लोकजीवन के विविध रंग मुखर हुए। सम्मानित कवि डॉ. ओम प्रकाश ने अपनी अनेक लोकप्रिय रचनाएँ सुनाईं। उनके प्रसिद्ध काव्य-संग्रह ‘विदा होती बेटियाँ’ की शीर्षक कविता की पंक्तियाँ—
“विदा होती जाती हैं बेटियाँ,
जैसे विदा हो जाती है आँगन की धूप,
चुप हो जाती हैं मंदिर की घंटियाँ…”
ने श्रोताओं को भावुक कर दिया। उनकी अन्य कविताओं ‘प्रेम पत्र’, ‘पिता के सपने’, ‘माँ का अकेलापन’ तथा “सबसे कठिन है पत्थर दिल होती दुनिया में प्रेम बचाए रखना” आदि ने संवेदनाओं के शिखर छुए। इन रचनाओं में परिवार, रिश्तों, प्रेम और मनुष्यता की अनुभूतियों ने उपस्थित श्रोताओं से गहरा आत्मीय संवाद स्थापित किया।
अध्यक्षता कर रहे जगदीश पंथी की कविताओं “बड़ा नीक लागे ननद तोर गउँवा” तथा “प्रेम तुम्हारा मिला कि सावन बरस गया” ने माटी की सोंधी गंध बिखेरी। इनके अतिरिक्त माहिर मिर्जापुरी, डॉ. योगेन्द्र मिश्र, डॉ. अजय विक्रम, डॉ. देवेन्द्र श्रीवास्तव, सचिन मिश्र, रमाकान्त पाण्डेय, बहर बनारसी और विजयलक्ष्मी पटेल सहित अनेक कवियों ने अपनी सारगर्भित एवं सशक्त रचनाओं का पाठ किया। काव्य-संध्या में हिंदी की खड़ी बोली के साथ लोकभाषाओं की सहजता और सांस्कृतिक मिठास का सुंदर संगम देखने को मिला। विभिन्न लोकभाषाओं में प्रस्तुत कविताओं ने श्रोताओं को देर रात तक बाँधे रखा।
इस अवसर पर सोन संगम के कार्यकारी अध्यक्ष विजय दुबे, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, शक्तिनगर परिसर के प्रभारी डॉ. प्रदीप यादव, विवेकानन्द वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य अरविन्द मौर्य, केन्द्रीय विद्यालय शक्तिनगर के उप-प्रधानाचार्य मृत्युंजय सिंह, डॉ. छोटेलाल प्रसाद, मायाराम, डॉ. योगेन्द्र वी.एस. तिवारी, राजनाथ दुबे, आदिप सिंह चौहान, सुशील सिंह, उदय नारायण पाण्डेय, करुणा माथुर, रीता पाण्डेय, सौम्या, समिधा एवं गौतमी सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन डॉ. मानिक चन्द पाण्डेय ने किया। स्व. डॉ. शालिग्राम शर्मा की स्मृति को समर्पित यह आयोजन साहित्य के माध्यम से अपनी माटी, लोक-संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं को सहेजने का आत्मीय अवसर बना।
