*सिंगरौली ने नेतृत्व की विरासत एवं समर्पित सेवाओं को किया सम्मानित*
सोनभद्र। एनटीपीसी सिंगरौली में दीर्घकालीन, समर्पित एवं उत्कृष्ट सेवाओं के उपरांत सेवानिवृत्त हो रहे सी.एच. किशोर कुमार, महाप्रबंधक (प्रचालन एवं अनुरक्षण) एवं राम अज़ोर यादव, वरिष्ठ प्रबंधक (सीएंडएम) के सम्मान में 31 अगस्त को प्रशासनिक भवन परिसर स्थित पुस्तकालय भवन के सभागार में गरिमामयी सम्मान एवं विदाई समारोह का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर दोनों अधिकारियों के दीर्घ एवं गौरवपूर्ण सेवाकाल तथा एनटीपीसी की विकास यात्रा में उनके बहुमूल्य योगदान, उत्कृष्ट नेतृत्व, कर्तव्यनिष्ठा, कार्य के प्रति प्रतिबद्धता एवं विशिष्ट विशेषज्ञता का भावपूर्ण अभिनंदन किया गया। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने संगठन के प्रति पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए संस्थान की प्रगति एवं सुदृढ़ता में महत्वपूर्ण योगदान दिया। समारोह में उपस्थित सहकर्मियों एवं शुभेच्छुओं ने उनके उल्लेखनीय योगदान एवं समर्पित सेवाओं के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए उनके जीवन के आगामी अध्याय के लिए सुखद, स्वस्थ, समृद्ध एवं संतोषपूर्ण भविष्य की मंगलकामनाएँ प्रेषित कीं।
इस गरिमामयी अवसर पर ई. प्रभाकर राव, परियोजना प्रमुख एवं कार्यकारी निदेशक, एनपीटीसी सिंगरौली, श्रीमती ई. निर्मला राव, अध्यक्षा (वनिता समाज), अंजन पाल, महाप्रबंधक (प्रचालन एवं ईंधन प्रबंधन), सुनील कुमार मिश्रा, महाप्रबंधक (प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग), सौमित्र घोष, महाप्रबंधक (अनुरक्षण ऐश डाइक प्रबंधन), ए.के. सिंह, महाप्रबंधक (तकनीकी सेवाएँ), तथा श्रीमती सुधा किशोर, उपाध्यक्षा (वनिता समाज) की गरिमामयी उपस्थिति रही। समारोह में विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, यूनियन एवं एसोसिएशन के पदाधिकारी, अधिकारीगण एवं कर्मचारीगण तथा वनिता समाज की वरिष्ठ सदस्याएँ उपस्थित रहीं। सभी ने सेवानिवृत्त हो रहे अधिकारियों की दीर्घकालीन सेवाओं, संगठन के प्रति उनकी निष्ठा एवं उल्लेखनीय योगदान के लिए हार्दिक सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त की।
सभी गणमान्यजनों ने दोनों अधिकारियों को उनके सेवाकाल की उपलब्धियों के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए उनके आगामी जीवन के लिए उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि, पारिवारिक आनंद, मानसिक शांति एवं सर्वांगीण संतुष्टि की मंगलकामना की। यह समारोह न केवल उनकी समर्पित सेवाओं के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता की अभिव्यक्ति था, बल्कि कर्तव्यनिष्ठा, नेतृत्व एवं संगठन के प्रति समर्पण की उस प्रेरणादायी विरासत का उत्सव भी था, जो भावी पीढ़ियों के लिए सदैव अनुकरणीय बनी रहेगी।
