प्रयागराज । उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज मंडल द्वारा आपातकालीन एवं दुर्घटना जैसी परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई, राहत एवं बचाव व्यवस्था की तैयारियों को परखने के उद्देश्य से आज 27 अगस्त को एक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। मॉक ड्रिल के अंतर्गत प्रयागराज – मानिकपुर खण्ड के कटइयाडंडी एवं डभौरा स्टेशनों के मध्य स्थित समपार फाटक संख्या 407 पर एक काल्पनिक दुर्घटना की सूचना प्रसारित की गई। सूचना के अनुसार, मालगाड़ी संख्या JJ-100 की समपार फाटक पार कर रही यात्रियों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली से टक्कर हो गई तथा दुर्घटना में बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की आशंका व्यक्त की गई। मालगाड़ी के गार्ड एवं लोको पायलट द्वारा घटना की सूचना तत्काल कंट्रोल कार्यालय, प्रयागराज को दी गई।
गंभीर आपातकालीन सूचना प्राप्त होते ही प्रयागराज मंडल एवं उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय के अधिकारियों द्वारा तत्काल आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ की गई। राहत एवं बचाव कार्यों की प्रक्रिया शुरू करते हुए प्रयागराज से दुर्घटना राहत चिकित्सा यान (ARMV) एवं दुर्घटना राहत गाड़ी (ART) को घटनास्थल के लिए तत्काल रवाना किया गया। मंडल रेल प्रबंधक/प्रयागराज रजनीश अग्रवाल भी अपनी टीम के साथ दुर्घटना राहत चिकित्सा यान से घटनास्थल के लिए रवाना हुए।
राहत दल के इरादतगंज पहुंचने पर यह जानकारी प्राप्त हुई कि उक्त घटना वास्तविक दुर्घटना नहीं, बल्कि मंडल के संरक्षा विभाग द्वारा आपातकालीन परिस्थितियों में रेल प्रशासन की तैयारियों एवं त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण करने के उद्देश्य से आयोजित मॉक ड्रिल थी। यह मॉक ड्रिल मालगाड़ी संख्या JJ-100 में मौजूद वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी उमेश चन्द्र शुक्ला की देखरेख में आयोजित की गई।
मॉक ड्रिल होने की जानकारी प्राप्त होने पर अधिकारियों एवं राहत दल ने राहत की सांस ली। इस अभ्यास के माध्यम से दुर्घटना अथवा अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में सूचना तंत्र की प्रभावशीलता, विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय, राहत एवं बचाव दलों की त्वरित उपलब्धता तथा उपलब्ध संसाधनों की तत्परता का परीक्षण किया गया। इस प्रकार के नियमित मॉक ड्रिल एवं अभ्यास वास्तविक आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित, प्रभावी एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके माध्यम से रेल प्रशासन की आपदा प्रबंधन तैयारियों को परखा जाता है तथा आवश्यकता के अनुरूप व्यवस्थाओं में सुधार भी किया जाता है।
