ओबरा थर्मल पावर स्टेशन द्वारा देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर भव्य एवं गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया

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ओबरा, ।ओबरा थर्मल पावर स्टेशन द्वारा देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर गांधी मैदान, ओबरा में भव्य एवं गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में इं. दूध नाथ, मुख्य महाप्रबंधक, ओबरा द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। ध्वजारोहण के पश्चात राष्ट्रगान के साथ पूरा वातावरण देशभक्ति एवं राष्ट्रीय गौरव की भावना से ओत-प्रोत हो उठा।

समारोह में इं. एस.के. सिंघल, महाप्रबंधक-ओबरा सी, इं. निखिल चतुर्वेदी, महाप्रबंधक-प्रशासन, इं. अजय कुमार राय, महाप्रबंधक-सिविल, इं. एम.एम. चतुर्वेदी, महाप्रबंधक-बीटीपीएस, एस.के. सिंह, कमांडेंट, सीआईएसएफ, इं. सुरेश मिश्रा, अधीक्षण अभियंता-सिविल, इं. रमाकांत, इं. अब्दुल निशात एवं इं. राजेश्वर प्रसाद, अधीक्षण अभियंतागण, अखिलेश त्रिपाठी, उप महाप्रबंधक (लेखा), डीपीएसआई के अधिकारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी, सीआईएसएफ के जवान, अन्य गणमान्य अतिथि, प्रेस एवं मीडिया प्रतिनिधि, विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं शिक्षकगण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में मुख्य महाप्रबंधक इं. दूध नाथ ने स्वतंत्रता दिवस को गौरव, कृतज्ञता और आत्ममंथन का अवसर बताते हुए स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग एवं बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता हमें अधिकारों के साथ राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी भी प्रदान करती है तथा हमें अपने कर्म, ईमानदारी और कार्यक्षमता के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत आज विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर प्रगति कर रहा है और इस विकास यात्रा में ऊर्जा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिजली केवल सुविधा नहीं, बल्कि आधुनिक जीवन की धड़कन और विकास की आधारभूत आवश्यकता है। ओबरा की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ओबरा केवल एक पावर स्टेशन नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की ऊर्जा यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

ओबरा बी की पुरानी 200 मेगावाट इकाइयों के योगदान तथा ऑयल खपत में कमी से प्राप्त उल्लेखनीय वित्तीय बचत का उल्लेख करते हुए उन्होंने ओबरा सी की 2×660 मेगावाट इकाइयों के बेहतर प्रदर्शन पर भी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि पहली तिमाही में इन इकाइयों का पीएलएफ निर्धारित लक्ष्य से अधिक रहा है।

ओबरा सी परियोजना के निर्माण के दौरान विस्थापित एवं पुनर्वासित परिवारों तथा स्थानीय नागरिकों के त्याग एवं सहयोग को स्मरण करते हुए मुख्य महाप्रबंधक ने उनके प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ओबरा सी की विकास यात्रा उनके त्याग, सहयोग और धैर्य से भी जुड़ी हुई है।उन्होंने कहा कि ओबरा की सफलता किसी एक विभाग की सफलता नहीं, बल्कि ऑपरेशन, मेंटेनेंस, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, सिविल, प्रशासन, मेडिकल, सुरक्षा तथा प्रत्येक कर्मचारी के सामूहिक समर्पण का परिणाम है। उन्होंने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से पूर्ण सतर्कता एवं सुरक्षित कार्यप्रणाली के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।

ऊर्जा संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि बिजली का उत्पादन हमारी जिम्मेदारी है, लेकिन जहां बिजली की आवश्यकता नहीं है, वहां उसका संरक्षण करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने ओबरा में चलाए जा रहे वृक्षारोपण अभियानों तथा लगाए गए पौधों की उचित देखभाल को स्वच्छ एवं सुरक्षित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया। भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने ओबरा डी में 2×800 मेगावाट की नई इकाइयों की स्थापना की दिशा में आगे बढ़ रही प्रक्रियाओं को प्रदेश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं एवं औद्योगिक विकास की तैयारी का महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने सभी से “देश पहले, कर्तव्य पहले, सुरक्षा पहले” की भावना के साथ कार्य करने तथा 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में अपना योगदान देने का आह्वान किया।

समारोह का प्रमुख आकर्षण विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे। विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रस्तुतियां देकर उपस्थित जनसमुदाय का मन मोह लिया। उनकी प्रतिभा, अनुशासन एवं देशभक्ति से ओत-प्रोत प्रस्तुतियों की उपस्थित अतिथियों एवं दर्शकों ने मुक्तकंठ से सराहना की। समारोह को सफल एवं गरिमामय बनाने में इं. सदानंद यादव, अधिशासी अभियंता, तथा उनकी पूरी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आयोजन की सफलता के लिए ओबरा थर्मल पावर स्टेशन के सभी संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यालयों, सुरक्षा बलों एवं सहयोगी टीमों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

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