संस्कृति मन्त्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, क्षेत्रीय केन्द्र, वाराणसी एवं सनबीम वीमेंस कॉलेज, वरुणा ने ‘विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस’ पर आयोजित कि चित्र प्रदर्शनी एवं रंगमंचीय कार्यक्रम
वाराणसी,/ संस्कृति मन्त्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार सनबीम वीमेंस कॉलेज वरुणा एवं इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, क्षेत्रीय केन्द्र, वाराणसी के संयुक्त तत्त्वावधान मे “विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर चित्र प्रदर्शनी तथा रंगमंचीय प्रस्तुति इंक़लाब-ए-इश्क़ कार्यक्रम का गरिमापूर्ण आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तिलक राज कपूर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, पियाल भट्टाचार्य नाट्यशास्त्र के प्रकांड विद्वान, एवं संजय मिश्रा दैनिक जागरण के संपादक रहे ।
कार्यक्रम का शुभारंभ का दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, क्षेत्रीय केन्द्र, वाराणसी के क्षेत्रीय निदेशक डॉ अभिजित दीक्षित द्वारा सभी अतिथियों को शॉल एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।।इस कार्यक्रम में भारत के विभाजन की पीड़ादायक स्मृतियों, संघर्षों और मानवीय संवेदनाओं को स्मरण करने तथा युवा पीढ़ी को इतिहास के मानवीय, सांस्कृतिक एवं सामाजिक पक्ष से परिचित कराने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम में इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, वाराणसी द्वारा विभाजन की केंद्रीय विषयवस्तु पर आधारित समवकार संस्था द्वारा रंगमंचीय प्रस्तुति इंक़लाब-ए-इश्क़ प्रस्तुत किया गया जिसका निर्देशन गुंजन शुक्ला ने किया। इस नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से विभाजन के उस दौर की मानवीय संवेदनाओं और उन अनकही कहानियों को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा गया, जिन्हें इतिहास के पन्नों में केवल घटनाओं और आँकड़ों के रूप में पढ़ा जाता है साथ ही में विभाजन के दौरान विस्थापन, संघर्ष, पीड़ा और मानवीय त्रासदी के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक सद्भाव के महत्व को रेखांकित किया गया ।
इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, वाराणसी के क्षेत्रीय निदेशक डॉ अभिजित दीक्षित ने अपने संबोधन में कहा कि इतिहास को याद करने का उद्देश्य किसी प्रकार की कटुता को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि अतीत से सीख लेकर वर्तमान और भविष्य को अधिक शांतिपूर्ण, समावेशी एवं मानवीय बनाना है।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तिलक राज कपूर ने कहा कि विभाजन की त्रासदी हमें यह स्मरण कराती है कि राष्ट्रीय एकता, आपसी सद्भाव और मानवता ही किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति हैं। हम ऐसा भारत बनाएं,जहाँ किसी को अपनी पहचान के कारण भय न हो,जहाँ विविधता हमारी शक्ति बने,जहाँ संवाद की जगह हिंसा न ले,और जहाँ मानवता सबसे ऊपर हो। इस अवसर पर दैनिक जागरण के संपादक श्री संजय मिश्रा जी ने युवाओं को प्रेरित करते हुए उनको विभाजन की विभीषिका से परिचय करवाया।
कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय की प्रशासनिक अधिकारी डॉ. शालिनी सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, , क्षेत्रीय केंद्र, वाराणसी के अधिकारियों एवं कलाकारों, महाविद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों तथा छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवा पीढ़ी को इतिहास के प्रति संवेदनशील बनाने के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता की भावना को मजबूत करते हैं। कार्यक्रम का सफल संचालन हिंदी की प्रवक्ता डॉ. पूजा सिंह ने किया। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि विभाजन की पीड़ा को नफरत की विरासत नहीं, बल्कि एकता, शांति, सद्भाव और मानवता की सीख के रूप में याद किया जाएगा। इस कार्यक्रम संस्कार भारती के विभिन्न पदाधिकारी एवं काशी के प्रबुद्ध जन सम्मिलित रहे।
