प्रयागराज। रेल संरक्षा आयुक्त, पूर्वोत्तर परिमंडल प्रणजीव सक्सेना ने आज 24 जुलाई को बिरोही–गैपुरा रेल खंड के मध्य नवनिर्मित तीसरी रेल लाइन का विस्तृत संरक्षा निरीक्षण किया। इस निरीक्षण का उद्देश्य नई रेल लाइन पर यात्री एवं मालगाड़ियों के परिचालन से पूर्व ट्रैक, सिग्नल एवं दूरसंचार प्रणाली, ओवरहेड विद्युत उपकरण (ओएचई) तथा अन्य संरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं का गहन परीक्षण करना था। इस अवसर पर वरिष्ठ उप महाप्रबंधक, उत्तर मध्य रेलवे विनीत कुमार श्रीवास्तव, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) अजीत सिंह यादव, अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन) मो. मुबश्शिर वारिस, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी यू. सी. शुक्ला, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक (समन्वय) मयंक राणा, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर-I अंकित गुप्ता सहित उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय के निर्माण विभाग के अन्य अधिकारी तथा प्रयागराज मंडल के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
निरीक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत रेल संरक्षा आयुक्त ने सर्वप्रथम मोटर ट्रॉली द्वारा बिरोही–गैपुरा खंड के मध्य नवनिर्मित तीसरी रेल लाइन का सूक्ष्म निरीक्षण किया। इसके उपरांत उन्होंने गैपुरा स्टेशन की इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली का निरीक्षण कर उसकी कार्यप्रणाली का परीक्षण किया। निरीक्षण के अगले चरण में गैपुरा से बिरोही के मध्य डीजल लोकोमोटिव द्वारा स्पीड ट्रायल किया गया, जिसके माध्यम से ट्रैक की गुणवत्ता एवं परिचालन क्षमता का परीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान रेल संरक्षा आयुक्त ने नई तीसरी रेल लाइन पर बिछाई गई पटरियों, पॉइंट एवं क्रॉसिंग, पुल-पुलियाओं, सिग्नलिंग व्यवस्था तथा दूरसंचार प्रणाली का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी प्राप्त की तथा संरक्षा से जुड़े आवश्यक अभिलेखों एवं परीक्षण रिपोर्टों का भी अवलोकन किया।
निरीक्षण के दौरान विभिन्न तकनीकी टीमों द्वारा ट्रैक, सिग्नल एवं दूरसंचार, विद्युत तथा अन्य प्रणालियों के संबंध में आवश्यक प्रदर्शन प्रस्तुत किए गए। साथ ही निर्धारित गति से विशेष निरीक्षण रेलगाड़ी का संचालन कर ट्रैक की स्थिरता, संरचनात्मक गुणवत्ता एवं सुरक्षित परिचालन क्षमता का परीक्षण भी किया गया। बिरोही–गैपुरा खंड के मध्य तीसरी रेल लाइन का निर्माण पूर्ण होने के उपरांत रेल संरक्षा आयुक्त द्वारा किया गया यह संरक्षा निरीक्षण इस परियोजना के परिचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं अनिवार्य चरण है। रेल संरक्षा आयुक्त की स्वीकृति प्राप्त होने के उपरांत इस नई तीसरी रेल लाइन पर रेल परिचालन प्रारंभ किया जाएगा। इस परियोजना के पूर्ण रूप से चालू होने पर इस व्यस्त रेल मार्ग की लाइन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे ट्रेनों का संचालन अधिक सुगम, सुरक्षित एवं समयबद्ध हो सकेगा। साथ ही यात्री एवं मालगाड़ियों के परिचालन में दक्षता बढ़ेगी तथा भविष्य में बढ़ते रेल यातायात को बेहतर ढंग से संचालित करने में सहायता मिलेगी।
