बोकारो ।इस्पात संयंत्र एवं अखिल भारतीय चेतना दर्पण के संयुक्त तत्वावधान में सेक्टर-5 स्थित पुस्तकालय में कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि पुस्तकालय में आयोजित यह मासिक कवि-गोष्ठी साहित्यिक संवाद, सृजनशीलता और रचनात्मक अभिव्यक्ति का एक सशक्त मंच है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि नगर के वरिष्ठ एवं अनुभवी कवि तथा साहित्यकार अपने अनुभवों से युवा एवं उभरते रचनाकारों का मार्गदर्शन करें, जिससे उनकी लेखन प्रतिभा को नई दिशा एवं प्रोत्साहन मिल सके।
वक्ताओं ने कहा कि बोकारो इस्पात संयंत्र द्वारा साहित्यकारों एवं कवियों को उपलब्ध कराया गया यह मंच साहित्यिक गतिविधियों के संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका सार्थक एवं रचनात्मक उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि साहित्य, संगीत और कला मानव जीवन को संवेदनशील एवं समृद्ध बनाते हैं। इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने सभी साहित्यकारों को शुभकामनाएँ देते हुए प्रसन्नता व्यक्त की कि मासिक गोष्ठी में कवि नियमित रूप से अपनी रचनाओं का पाठ कर साहित्यिक वातावरण को सुदृढ़ बना रहे हैं। गोष्ठी के दौरान उपस्थित साहित्यकारों ने रचनाओं के पाठ, साहित्यिक संवाद एवं विचार-विमर्श के लिए निरंतर सहयोग एवं मंच उपलब्ध कराने हेतु बोकारो इस्पात संयंत्र के प्रति आभार व्यक्त किया।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ अरुण पाठक द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना “हे सरस्वती विद्यादायिनी” से हुआ। इसके उपरांत कवियों ने अपनी उत्कृष्ट एवं भावपूर्ण रचनाओं का पाठ कर वातावरण को काव्यमय बना दिया। इस क्रम में सुश्री करुणा कालिका ने “हर नदी की चाह”, रजत नाथ ने “तब तुम समझ लेना”, दिनानाथ ठाकुर ने “करने दो गुणगान वतन का”, अतुल कुमार ने “माँ भारती की पुकार” तथा डॉ. परमेश्वर भारती ने “मानवीकरण” शीर्षक कविता का प्रभावशाली पाठ किया।
कार्यक्रम के अगले चरण में अरुण पाठक ने “हम हैं बिहार, बिहार है गौरव”, सुश्री रीना यादव ने “लोग नाराज़ हैं बेटियों से”, सुश्री प्रीति प्रियंवदा ने “सफलता का पत्र”, सुश्री अमृता शर्मा ने “जिससे शुरू, उससे खत्म”, सुश्री कस्तूरी सिन्हा ने “बातें होना ज़रूरी है”, डॉ. मनोज कुमार सिंह ने ग़ज़ल, दिनेश सिंह ने “सावन”, सुश्री रिंकू गिरि ने “दर्शन तेरे”, सुश्री संजू कुमारी ने “रथ यात्रा”, सुश्री ज्योतिर्मयी डे ने “ज़िंदगी”, गंगेश पाठक ने मैथिली कविता, डी.एन. सिंह ने “परिवार के आदर्श”, सुश्री गीता कुमारी गुस्ताख ने “समर्पित स्त्री का सच”, मनोज उपाध्याय ‘सुमन’ ने “मां का प्यार” तथा डॉ. नरेंद्र कुमार राय ने “सच छुपाया गया था, बताने चलें” शीर्षक कविता का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस कार्यक्रम का मंच संचालन सुश्री अमृता शर्मा द्वारा एवं धन्यवाद ज्ञापन सुश्री कस्तूरी सिन्हा द्वारा किया गया।
