शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और अनशनरत वैज्ञानिक सोनम वांगचुक के समर्थन में वाराणसी में सभा एवं कैंडल मार्च

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वाराणसी/ अंबेडकर पार्क कचहरी पर साझा संस्कृति मंच ने देश में गहराते शिक्षा संकट, लगातार हो रहे परीक्षा-पत्र लीक, शिक्षा के बढ़ते निजीकरण तथा लोकतांत्रिक आवाज़ों के दमन के खिलाफ जनसभा आयोजित करके मुखर विरोध दर्ज कराया। सभा के बाद कैंडल मार्च निकालकर बीजेपी सरकार की शिक्षा नीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाई गई। फादर आनंद ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में देश की शिक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताएं, सरकारी स्कूलों को बंद करने की नीतियां, महंगी होती शिक्षा और नई शिक्षा नीति की विफलताओं ने करोड़ों छात्रों और युवाओं के भविष्य को असुरक्षित बना दिया है। ऐसी स्थिति में शिक्षा मंत्री का पद पर बने रहना नैतिक रूप से उचित नहीं है।

धन्नजय त्रिपाठी ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में देशभर में 94 हजार से अधिक सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं। उच्च शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है, जबकि निजी विश्वविद्यालयों, सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों और कोचिंग उद्योग को बढ़ावा देकर शिक्षा को आम लोगों की पहुंच से दूर किया जा रहा है। गरीब, दलित, पिछड़े, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के दरवाजे लगातार संकरे किए जा रहे हैं। जगृति राही ने कि प्रख्यात वैज्ञानिक सोनम वांगचुक, छात्रनेता नेहा, मनीष तथा अन्य छात्र-युवा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं। लोकतंत्र में उनकी मांगों को सुनने और समाधान निकालने के बजाय सरकार दमन और उपेक्षा का रास्ता अपना रही है, जो अत्यंत चिंताजनक है।

नंदलाल मास्टर ने कहा कि नई शिक्षा नीति ने शिक्षा को वैज्ञानिक, लोकतांत्रिक और समतामूलक बनाने के बजाय उसे केंद्रीकृत, बाज़ारोन्मुख और वैचारिक नियंत्रण का माध्यम बना दिया है। विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता कमजोर की जा रही है। कुलपतियों और महत्वपूर्ण शैक्षणिक पदों पर योग्यता और अकादमिक स्वतंत्रता के बजाय वैचारिक निकटता को प्राथमिकता मिलने के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। परिसरों में असहमति की आवाज़ों को दबाया जा रहा है और शिक्षा संस्थानों को राजनीतिक प्रचार का मंच बनाया जा रहा है।अधिवक्ता अबु हाशमी ने कहा जौहर विश्वविद्यालय ओर बुलडोजर कार्यवाही दमन की इंतहा है। शैक्षणिक परिसरों में बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप से यह संदेश जाता है कि सरकार शिक्षा को स्वतंत्र विचार और आलोचनात्मक चिंतन के केंद्र के बजाय सत्ता समर्थक ढांचे में बदलना चाहती है। यह प्रवृत्ति लोकतंत्र और संविधान की भावना के प्रतिकूल है। आज के कार्यक्रम में प्रेरणा कला मंच के साथियों ने जनगीत गाये। आगे का कार्यक्रम में 19 जुलाई क़ो एक दिन का उपवास शास्त्री घाट पर किया जाएगा।आज के कार्यक्रम में प्रमुख रूप से फादर आनंद, निति भाई , जागृति अब्दुल्ला भाई, नंद लाल मास्टर, धनंजय त्रिपाठी, विनय राय मुन्ना, गगन, सिस्टर फ्लोरिन, गौरव, अनिल,फादर दयाकर, अबू आजमी, डॉ अनूप श्रमिक, निति, जीतेन्द्र, महेंद्र, आदि साथी उपस्थित रहे।.  

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