दुद्धी, सोनभद्र। यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कठिन से कठिन मुकाम भी हासिल किया जा सकता है। आज इसी सपने को दुद्धी की बेटी ने सच कर दिखाया है। ये जज्बा है दुद्धी जैसे छोटे से कस्बे में रहने वाली उस लड़की का जिसने आल इंडिया स्तर पर होने वाली चिकित्सा जगत की प्रतिष्ठापरक विदेशी मेडिकल स्नातक परीक्षा (एफएमजीई) में कामयाबी का डंका बजाया है। महज 13 फीसदी के इर्द-गिर्द परीक्षा परिणाम रखने वाले, फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम को दुद्धी की एक बिटिया ने क्वालीफाई कर चिकित्सा जगत को नया आयाम दिया है। यह कामयाबी इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि डॉक्टर बेटी दुद्धी अंचल की रहने वाली है जो शिक्षा के मामले में यूपी के सबसे पिछड़े क्षेत्र का दर्जा हासिल है। दुद्धी तहसील मुख्यालय निवासी वरिष्ठ पत्रकार मोहम्मद शमीम अंसारी की छोटी बेटी डॉ.एरम अंसारी ने येरेवन स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी अर्मेनिया से पिछले साल 2025 में डिग्री लेने के बाद यह परीक्षा पास कर चिकित्सा क्षेत्र में अपना लोहा मनवाई हैं।
बता दें कि विदेश में पढ़ाई करने वाले एमबीबीएस छात्र-छात्राओं को भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम (विदेशी मेडिकल स्नातक परीक्षा) देना पड़ता है। इसे क्वालीफाई करने के बाद ही उन्हें यहां प्रैक्टिस करने की अनुमति मिलती है।बीते 28 जून को आल इंडिया लेवल पर इस परीक्षा का आयोजन किया गया था। जिसमें कुल 37448 बच्चे शामिल हुए थे। ठीक दसवें दिन परिणाम सोमवार को दोपहर जारी हुआ। मात्र 12.78 प्रतिशत रिजल्ट वाले इस एग्जाम में 4635 बच्चे पास हुए। पिछड़े अंचल का दर्जा रखने वाले दुद्धी तहसील मुख्यालय की बेटी को चिकित्सा जगत की प्रतिष्ठापरक परीक्षा क्वालीफाई करने को लेकर इलाके के लोगों में प्रसन्नता का माहौल है। बता दें इसके पूर्व वर्ष 2024 में भी दुद्धी क्षेत्र की चार बेटियों ने इस परीक्षा को पास किया था जिसमें मु. शमीम अंसारी की बड़ी बेटी डॉ ऐमन अंसारी भी शामिल थी।
