राउरकेला।सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) के इस्पात जनरल अस्पताल (आईजीएच) के चिकित्सकों ने एक अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण चिकित्सा मामले का सफलतापूर्वक उपचार किया। सुंदरगढ़ जिले के चांदीपोश ग्राम के निवासी 13 वर्षीय मास्टर आयुष खालखो को सर्पदंश के बाद गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था। बाद में उपचार के दौरान उसमें स्क्रब टाइफस से जुड़ी एन्सेफलाइटिस (दिमाग को प्रभावित करने वाला एक जानलेवा संक्रमण) का पता चला। बालक को सर्पदंश एवं तेज बुखार के इतिहास के साथ आईजीएच में भर्ती कराया गया था। इसके बाद उसकी स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी। उसे होश में बदलाव और न्यूरोलॉजिकल लक्षण महसूस हुए, जिसके लिए गहन निगरानी और एडवांस्ड लाइफ़ सपोर्ट की ज़रूरत पड़ी। आगे की जाँच में स्क्रब टाइफस आईजीएम पॉज़िटिव पाया गया, जबकि मस्तिष्कमेरु द्रव (सीएसएफ) की जाँच में स्क्रब एन्सेफलाइटिस के संकेत मिले। यह स्क्रब टाइफस की एक गंभीर रूप थी, जो मस्तिष्क एवं तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकती थी ।
इन दोनों स्थितियों में से किसी एक का उपचार भी चुनौतीपूर्ण था, जबकि सर्प विषाक्तता और स्क्रब टाइफस से मस्तिष्क प्रभावित होने की स्थिति का एक साथ उपस्थित होना इस मामले को और अधिक जटिल बना रहा था। इसके लिए विभिन्न विशेषज्ञताओं के समन्वित उपचार की आवश्यकता पड़ी।
रोगी का उपचार गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में किया गया, जहाँ उसे अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर सुविधाएँ प्रदान की गईं। उपचार में मैकेनिकल वेंटिलेशन, एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) थेरेपी, लक्षित रोगाणुरोधी उपचार तथा चौबीसों घंटे निगरानी शामिल थी। समय पर निदान, सूक्ष्म चिकित्सकीय प्रबंधन तथा चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप रोगी की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने लगा । उसे सफलतापूर्वक वेंटिलेटर सपोर्ट से मुक्त किया गया और अब वह पूर्णतः स्वस्थ होने की दिशा में अग्रसर है तथा अस्पताल से छुट्टी के लिए तैयार है। इस जटिल मामले का उपचार शिशु रोग विभाग द्वारा किया गया, जिसका नेतृत्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं प्रभारी (स्वस्थ्य एवं चिकित्सा), डॉ. जयंत कुमार आचार्य द्वारा किया गया । उनके साथ विभागाध्यक्ष (शिशु रोग विभाग), डॉ. अर्चना बेहरा, अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी (शिशु रोग विशेषज्ञ), डॉ. माया बोस तथा समर्पित क्रिटिकल केयर टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
