जल निगम के अधिकारियों-कर्मचारियों का वेतन अग्रिम आदेश तक रोका, असंतुष्ट फीडबैक बढ़ने पर तहसीलदार दूद्धी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश
सोनभद्र। जन शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण को लेकर जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्ट्रेट सभागार स्थित जनसुनवाई कक्ष में आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने पाया कि अनेक प्रकरणों में शिकायतकर्ता की संतुष्टि प्राप्त किए बिना ही आख्या अपलोड कर संदर्भों का निस्तारण कर दिया गया है, जिसके कारण असंतुष्ट फीडबैक की संख्या लगातार बढ़ रही है। समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि शासन एवं मंडल स्तर से समय-समय पर जारी निर्देशों के बावजूद शिकायतों के निस्तारण में अपेक्षित गंभीरता नहीं बरती जा रही है। जिलाधिकारी ने कहा कि आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतकर्ता से संवाद स्थापित कर उसकी संतुष्टि सुनिश्चित करने की व्यवस्था पहले से उपलब्ध है, इसके बावजूद उसका अनुपालन न किया जाना अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। परिणाम स्वरूप असंतुष्ट फीडबैक में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है, जो शासन की मंशा के विपरीत है तथा पदीय दायित्वों के प्रति उदासीनता एवं लापरवाही का द्योतक है। उक्त स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने उ०प्र० जल निगम (ग्रामीण), सोनभद्र के अधिशासी अभियन्ता, सहायक अभियन्ता, अवर अभियन्ता सहित समस्त स्टाफ के माह जून-2026 के वेतन आहरण पर अग्रिम आदेश तक रोक लगाने के निर्देश दिए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि असंतुष्ट फीडबैक में कमी नहीं आती है तो उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई, यहां तक कि निलंबन की संस्तुति भी की जाएगी। समीक्षा बैठक में तहसील दूधी के अंतर्गत शिकायतों के निस्तारण में भी लापरवाही पाए जाने पर जिलाधिकारी ने तहसीलदार दूधी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जन शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की शिथिलता, लापरवाही अथवा औपचारिकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
