धनबाद। बीसीसीएल द्वारा आज कल्याण मंडपभ, जगजीवन नगर में ‘नए श्रम संहिताओं के तहत औद्योगिक संबंध संहिता’ (Industrial Relation Code under 04 New Labour Codes) विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया गया। कोल इंडिया के दिशा-निर्देशों के आलोक में आयोजित इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य भारत सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बीच जागरूकता को बढ़ावा देना तथा अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं की जानकारी देना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएमडी बीसीसीएल, मनोज कुमार अग्रवाल ने की। इस अवसर पर निदेशक (मानव संसाधन) मुरली कृष्ण रमैया, निदेशक (तकनीकी-संचालन) संजय कुमार सिंह, महाप्रबंधक (मानव संसाधन) कुमार मनोज, महाप्रबंधक (खनन/एचआरडी) सुधाकर प्रसाद, विभागाध्यक्ष (विधि) डॉ. कुमार शरत सिन्हा, विभागाध्यक्ष (औद्योगिक संबंध/सीएसआर) विभागाध्यक्ष (प्रशासन) मनीष मिश्रा सहित मुख्यालय के अन्य महाप्रबंधकगण, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, क्षेत्रीय महाप्रबंधक, क्षेत्रीय प्रबंधक (मानव संसाधन) तथा बीसीसीएल के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में झारखंड उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप कुमार मेहता ने सहभागिता की। उन्होंने नए श्रम संहिताओं, विशेषकर ‘इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड’ के विभिन्न प्रावधानों, विधिक पहलुओं तथा अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा लागू की गई नई श्रम संहिताएँ श्रम सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम हैं, जिनका उद्देश्य श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के साथ-साथ औद्योगिक विकास एवं व्यावसायिक सुगमता के बीच संतुलन स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि बदलते औद्योगिक परिवेश में श्रम कानूनों का सरलीकरण, पारदर्शिता तथा डिजिटल अनुपालन व्यवस्था उद्योगों के लिए अधिक प्रभावी एवं उत्तरदायी कार्यसंस्कृति विकसित करने में सहायक सिद्ध होगी।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में सीएमडी, बीसीसीएल मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान औद्योगिक परिवेश में श्रम सुधारों की जानकारी और उनका प्रभावी अनुपालन बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नई श्रम संहिताएँ श्रमिक हितों की सुरक्षा, औद्योगिक संतुलन, पारदर्शिता तथा संगठनात्मक दक्षता को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। उन्होंने कहा कि बीसीसीएल सदैव श्रमिक कल्याण, सुरक्षित कार्य वातावरण तथा सकारात्मक औद्योगिक संबंधों के प्रति प्रतिबद्ध रहा है और भविष्य में भी इस दिशा में निरंतर प्रयासरत रहेगा। उन्होंने उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे नए श्रम कानूनों की सभी प्रावधानों की समुचित जानकारी के साथ कार्यस्थल पर इनके प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। स्वागत संबोधन करते हुए निदेशक (मानव संसाधन) मुरली कृष्ण रमैया ने कार्यक्रम की आवश्यकता, महत्व एवं उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड के निर्देश के आलोक में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नए श्रम कानूनों के विभिन्न प्रावधानों की समुचित जानकारी उपलब्ध कराना है। श्रम संहिताओं का प्रभावी क्रियान्वयन संगठन में बेहतर औद्योगिक संबंधों एवं कार्यकुशलता को बढ़ावा देगा।
निदेशक (तकनीकी-संचालन) संजय कुमार सिंह ने कहा कि वर्तमान चुनौतीपूर्ण एवं तेजी से बदलते कार्य परिवेश में नए श्रम सुधार एक महत्वपूर्ण एवं प्रासंगिक विषय हैं। उन्होंने कहा कि औद्योगिक संस्थानों के सुचारु संचालन, श्रमिक हितों की सुरक्षा तथा विधिक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए इन प्रावधानों की स्पष्ट समझ होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संवादात्मक कार्यक्रम विधायी प्रक्रियाओं की समुचित जानकारी और संस्थागत क्षमता निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के समापन सत्र में एक संवादात्मक चर्चा आयोजित की गई, जिसमें उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नए श्रम संहिताओं से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका अनूप कुमार मेहता ने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। इस संवादात्मक सत्र ने प्रतिभागियों को विषय की व्यावहारिक समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष (विधि) डॉ. कुमार शरत सिन्हा ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता हेतु सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
