मंत्री ए.के. शर्मा के प्रयासों से ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक विस्तार, यूपी बनेगा और पावरफुल……

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2400 मेगावाट की नई तापीय परियोजना को मिली मंजूरी, प्रदेश को मिलेगी सस्ती और पर्याप्त बिजली, मीरजापुर पूलिंग उपकेंद्र एवं नई पारेषण परियोजनाओं से और मजबूत होगी बिजली व्यवस्था, एनटीपीसी के साथ संयुक्त उपक्रम में बनेगी ₹38,358 करोड़ की विशाल ऊर्जा परियोजना

लखनऊ । उत्तर प्रदेश को ऊर्जा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि प्राप्त हुई है। प्रदेश सरकार ने 3×800 मेगावाट क्षमता की नई तापीय ऊर्जा परियोजना को मंजूरी प्रदान की है। कुल 2400 मेगावाट क्षमता वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना की लागत लगभग ₹38,358 करोड़ होगी। इस परियोजना को प्रदेश सरकार एवं एनटीपीसी के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से स्थापित और संचालित किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश में भविष्य की बढ़ती विद्युत मांग को देखते हुए 765/400 kV, (4×1500 MVA) मीरजापुर पूलिंग उपकेंद्र (ए०आई०एस०) एवं सम्बन्धित पारेषण लाइनों के निर्माण का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। इस परियोजना के माध्यम से विभिन्न तापीय एवं पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं से उत्पादित विद्युत के सुचारु निर्गमन को सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे प्रदेश की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था और अधिक मजबूत एवं विश्वसनीय बनेगी।

नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा ने इस ऐतिहासिक निर्णय पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में प्रदेश में लगभग 4000 मेगावाट की नई तापीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई है, जिससे प्रदेश की तापीय ऊर्जा क्षमता लगभग दोगुनी हो चुकी है। अब सरकार इसे तीन गुना करने के लक्ष्य की दिशा में कार्य कर रही है। यह नई परियोजना उसी संकल्प का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ऊर्जा मंत्री श्री शर्मा ने बताया कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान एनटीपीसी के साथ इस परियोजना के लिए अनुबंध किया था। आज मंत्रिपरिषद द्वारा मिली मंजूरी उस संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम है।उन्होंने बताया कि मीरजापुर पूलिंग उपकेंद्र परियोजना के अंतर्गत अडानी मीरजापुर तापीय परियोजना, JSW की पम्प्ड स्टोरेज परियोजना तथा अडानी सौर ऊर्जा परियोजना सहित अन्य ऊर्जा परियोजनाओं को मजबूत पारेषण नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। मीरजापुर पूलिंग उपकेंद्र को साझा सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में विकसित किया जाएगा। परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹2799.47 करोड़ है, जिसमें उपकेंद्र एवं ‘बे’ निर्माण हेतु ₹1315.91 करोड़ तथा पारेषण लाइनों हेतु ₹1483.56 करोड़ प्रस्तावित हैं।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के शुरू होने से प्रदेश में उद्योगों, किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों को सस्ती, पर्याप्त और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने में बड़ी सहायता मिलेगी। साथ ही रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।श्री शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल जनसंख्या के आधार पर ही नहीं, बल्कि ऊर्जा क्षमता और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भी देश का अग्रणी राज्य बनता जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर घर, हर गांव और हर उद्योग तक गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाई जाए।

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