सेल ने चौथी तिमाही एवं वित्तीय वर्ष 2025-26 के वित्तीय परिणाम घोषित किए

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पूरे वर्ष के लिए परिचालन से कुल राजस्व बढ़कर 1,10,810 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष के 1,02,478 करोड़ रुपये की तुलना में अधिक

राउरकेला। स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड (सेल) ने आज 31 मार्च, 2026  को समाप्त तिमाही एवं वित्तीय वर्ष के लिए अपने वित्तीय परिणाम घोषित किए। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कच्चे इस्पात का उत्पादन बढ़कर 19.43 मिलियन टन हो गया, जो पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि में उत्पादित 19.17 मिलियन टन की तुलना में 1.4% की वृद्धि दर्शाता है। विस्तारित बाजार पहुँच, सुनियोजित इन्वेंट्री में कमी तथा सुव्यवस्थित प्रेषण के चलते बिक्री मात्रा में उल्लेखनीय दो अंकीय वृद्धि दर्ज की गई। बिक्री मात्रा 11.4% बढ़कर पिछले वित्तीय वर्ष के 17.89 मिलियन टन से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 में 19,93 मिलियन टन हो गई।

पूरे वर्ष के लिए परिचालन से कुल राजस्व बढ़कर 1,10,810 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष के 1,02,478 करोड़ रुपये की तुलना में अधिक है। कर पश्चात लाभ (PAT) में 50.5% की जबरदस्त वृद्धि दर्ज हुई और यह बढ़कर 3,233  करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष के 2,148 करोड़ रुपये की तुलना में काफी अधिक है। इसके अतिरिक्त, कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट को और मजबूत बनाते हुए पिछले वर्ष की तुलना में कुल ऋण में 8,148 करोड़ रुपये की कमी की है।

कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में सभी प्रमुख मानकों पर सशक्त प्रदर्शन किया है, जो इसके मूल व्यवसाय की मजबूती और तन्याकता  को दर्शाता है। बिक्री मात्रा में वृद्धि के साथ-साथ इन्वेंट्री और उधारी में कमी तथा बेहतर तकनीकी-आर्थिक मानकों, जैसे ब्लास्ट फर्नेस उत्पादकता में सुधार और ऊर्जा खपत का अनुकूलन ने परिचालन दक्षता और लाभप्रदता को काफी मजबूत किया है। उल्लेखनीय है कि, बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के बावजूद, कंपनी ने संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए अपनी प्रदर्शन गति बनाए रखी।

परिणामों पर टिप्पणी करते हुए सेल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी), डॉ. ए के पंडा ने कहा: “हमारा प्रदर्शन हमारे मुख्य परिचालन की अंतर्निहित मजबूती को दर्शाता है, जिसे बाजार उपस्थिति विस्तार तथा बदलती मांग के अनुरूप उत्पाद पोर्टफोलियो को संरेखित करने के लिए किए गए केंद्रित प्रयासों का समर्थन प्राप्त हुआ है। बिक्री मात्रा में वृद्धि तथा इन्वेंट्री और उधारी में कमी ने हमारी लाभप्रदता को और सुदृढ़ किया है। परिणामस्वरूप, पीबीटी और पीएटी में क्रमशः 44% और 50.5% की वृद्धि दर्ज की गई है। आगे बढ़ते हुए, हम अपने पोर्टफोलियो में मूल्यवर्धित और विशेष इस्पात के हिस्से को बढ़ाने पर अधिक ध्यान देंगे। निरंतर अवसंरचना विकास के कारण घरेलू इस्पात खपत का उत्साहजनक परिदृश्य हमारे विस्तार योजनाओं के लिए अनुकूल संकेत देता है। हम अपने हितधारकों को सतत मूल्य और दीर्घकालिक विकास प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

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