लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत संचालित रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (आर.एस.ए.सी.), लखनऊ में आकाशीय बिजली (लाइटनिंग) से बचाव एवं उसके प्रभावी न्यूनीकरण के उपायों पर एक उच्च स्तरीय वैज्ञानिक विचार-विमर्श का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में इसरो, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA), स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी SDMA) तथा अन्य संबंधित संस्थाओं के विशेषज्ञों एवं अधिकारियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संस्थाओं द्वारा प्रस्तुतियों के माध्यम से आकाशीय बिजली के वैज्ञानिक एवं तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इसरो के वैज्ञानिकों ने आकाशीय बिजली के पूर्वानुमान के लिए ग्राउंड सेंसर के माध्यम से डेटा एकत्र करने तथा उसे भुवन पोर्टल पर उपलब्ध कराने की जानकारी दी। साथ ही प्रदेश में ग्राउंड सेंसर नेटवर्क के विस्तार की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी द्वारा आकाशीय बिजली से संबंधित सामुदायिक आधारित मूल्यांकन, जनजागरूकता, क्षमता विकास, शोध एवं प्रबंधन कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी साझा की गई।
उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा प्रदेश में आकाशीय बिजली से निपटने हेतु संस्थागत एवं ऑपरेशनल फ्रेमवर्क की जानकारी प्रस्तुत की गई। साथ ही वैज्ञानिक संस्थानों से अपेक्षा की गई कि आकाशीय बिजली के पूर्वानुमान से संबंधित सटीक जानकारी एकीकृत प्लेटफॉर्म के माध्यम से सरल एवं सुलभ रूप में उपलब्ध कराई जाए। विचार-विमर्श के दौरान विभिन्न स्टेकहोल्डर्स द्वारा आकाशीय बिजली से बचाव एवं उसके प्रभावी न्यूनीकरण के लिए जोखिम क्षेत्रों (हॉटस्पॉट्स) की पहचान पर किए जा रहे कार्यों एवं सुझावों को भी साझा किया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा आर.एस.ए.सी. के अधिकारी एवं वैज्ञानिक उपस्थित रहे।
