,सीमित संसाधनों वाले परिवारों के विद्यार्थियों के लिए यह पहल भविष्य निर्माण का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है
हजारीबाग। एनमएल केरेडारी कोयला खनन परियोजना अपने निगमीय सामाजिक उत्तरदायित्व एवं सामुदायिक विकास पहलों के माध्यम से परियोजना प्रभावित एवं विस्थापित ग्रामीणों के जीवन में सार्थक परिवर्तन ला रही है। परियोजना प्रमुख अरुण कुमार सक्सेना के दूरदर्शी नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में तथा भूमि अधिग्रहण/पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन एवं सामुदायिक विकास विभाग के विभागाध्यक्ष एस. पी. गुप्ता की उपस्थिति में संचालित इन पहलों ने शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं।
इन पहलों के अंतर्गत ‘उत्कर्ष मेधावी छात्रवृत्ति’ योजना ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए एक मजबूत सहारा बनकर उभरी है। आर्थिक रूप से सीमित संसाधनों वाले परिवारों के विद्यार्थियों को यह योजना न केवल वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें उच्च शिक्षा की ओर आत्मविश्वास के साथ अग्रसर होने के लिए प्रेरित भी कर रही है। विशेष रूप से परियोजना प्रभावित परिवारों के विद्यार्थियों के लिए यह पहल भविष्य निर्माण का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।
बसरिया सहित आसपास के गाँवों में इस योजना का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। पहले जहाँ उच्च शिक्षा, विशेषकर तकनीकी शिक्षा, एक कठिन सपना प्रतीत होती थी, वहीं अब छात्र देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश लेकर अपनी पहचान बना रहे हैं। यह बदलाव केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे गाँव के शैक्षणिक वातावरण को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है। ऐसे ही एक लाभार्थी, जो एक कृषक परिवार से आते हैं और परियोजना प्रभावित परिवार से संबंध रखते हैं, वर्तमान में एक राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान अगरतला में बी.टेक की पढ़ाई कर रहे हैं। सीमित आय के कारण उनके लिए उच्च शिक्षा जारी रखना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन निरंतर छात्रवृत्ति सहायता ने उनकी शैक्षणिक यात्रा को स्थिरता और दिशा प्रदान की है। अब उनका लक्ष्य संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर समाज की सेवा करना है।
इस संदर्भ में छात्र के पिता ने भावुक होकर कहा, “यह पहल हमारे जैसे ग्रामीण परिवारों के लिए एक नई आशा लेकर आई है। पहले जहाँ उच्च शिक्षा एक दूर का सपना लगती थी, वहीं अब हमारे बच्चे बड़े लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इस सहयोग ने न केवल हमारे बेटे का रास्ता आसान किया है, बल्कि पूरे गाँव के बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रेरित किया है। इससे गाँव में शिक्षा का माहौल विकसित हो रहा है और बच्चे आगे बढ़ने के लिए उत्साहित हो रहे हैं।” एनमएल केरेडारी की ये पहलें इस बात का प्रमाण हैं कि जब विकास की धारा में शिक्षा को केंद्र में रखा जाता है, तो उसका प्रभाव व्यापक और स्थायी होता है। यह केवल सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण समुदायों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक सुदृढ़ कदम है।
