*छतर मंजिल से जरनैल कोठी तक, छात्रों ने जाना लखनऊ की ऐतिहासिक धरोहरों का महत्व*

*लखनऊ, / उत्तर प्रदेश में भारतीय विरासत के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक दिवसीय “यूथ हेरिटेज लीडरशिप प्रोग्राम” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय (संस्कृति विभाग) द्वारा आयोजित किया गया। भारतीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण व प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से चल रहे कार्यक्रमों की इसी श्रृंखला में यह पहल की गई। कार्यक्रम का आयोजन इतिहास संस्थान, नई दिल्ली के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के महत्व से परिचित कराना और उन्हें विरासत संरक्षण के लिए नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार करना था। इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों को ऐतिहासिक स्थलों का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। विद्यार्थियों ने राजधानी लखनऊ की छतर मंजिल और जनरल कोठी, कैसरबाग का भ्रमण किया। इस दौरान इन स्थलों के इतिहास, स्थापत्य शैली और संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी सरल और स्पष्ट भाषा में दी गई, ताकि छात्र इन धरोहरों को बेहतर तरीके से समझ सकें।
इस दौरान निदेशक सुश्री रेनू द्विवेदी ने विद्यार्थियों को विरासत की परिभाषा, स्वरूप, प्रकृति और उसकी पहचान के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने संवाद के माध्यम से समझाया कि सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। साथ ही विद्यार्थियों को अपनी विरासत के प्रति जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित किया।
इस कार्यक्रम पर अपने विचार प्रकट करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि “इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक इमारतों का भ्रमण कराना नहीं है, बल्कि युवाओं को अपनी विरासत से भावनात्मक रूप से जोड़ना है। ताकि वे इन धरोहरों को समझें और उन पर गर्व करें। उन्होंने बताया विरासत केवल अतीत की याद नहीं, बल्कि हमारी पहचान और भविष्य की दिशा भी है। इसलिए युवा पीढ़ी जागरूक और संवेदनशील बनकर सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं।”इस मौके पर जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालक विद्यालय और जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय के कक्षा 9वीं और 11वीं के लगभग 70 छात्र-छात्राओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। कार्यक्रम में इतिहास संस्थान से सुश्री सुयशा जी सहित पुरातत्व निदेशालय के अधिकारी, शिक्षकगण और विद्यालय के कर्मचारी भी मौजूद रहे। यह कार्यक्रम युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

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