प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक ने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर के शिखर पर, विधिवत मन्त्रोच्चार के साथ धर्मध्वजा का पुनर्स्थापन किया, कार्यक्रम में उ0प्र0 की राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के अध्यक्ष सम्मिलित हुए
भगवान श्रीराम मन्दिर के गर्भगृह की अनन्त ऊर्जा, श्रीराम परिवार का दिव्य प्रताप धर्म ध्वजा के रूप में इस दिव्यतम व भव्यतम मंदिर में प्रतिस्थापित हुआ : प्रधानमंत्री
आज हम सभी के लिए यह सार्थकता का दिवस, इस दिन के लिए अनेक लोगों ने सपना देखा, प्रयास किये तथा अपना बलिदान दिया : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक
अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम के भव्य मन्दिर पर ध्वजारोहण एक नये युग का शुभारम्भ,: मुख्यमंत्री
लखनऊ : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक डॉ0 मोहनराव भागवत ने आज अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर के शिखर पर, विधिवत मन्त्रोच्चार के साथ धर्मध्वजा का पुनर्स्थापन किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी तथा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के अध्यक्ष महन्त नृत्य गोपालदास जी महाराज उपस्थित रहे। इसके पूर्व, प्रधानमंत्री जी ने सप्त मन्दिर (महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज गुह, माता शबरी), शेषावतार मन्दिर तथा माता अन्नपूर्णा देवी मन्दिर में दर्शन-पूजन किया। इसके उपरान्त प्रधानमंत्री एवं डॉ0 मोहनराव भागवत ने श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर में पूजा-अर्चना की।
प्रधानमंत्री जी ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज भगवान श्रीराम मन्दिर के गर्भगृह की अनन्त ऊर्जा तथा श्रीराम परिवार का दिव्य प्रताप धर्म ध्वजा के रूप में इस दिव्यतम व भव्यतम मंदिर में प्रतिस्थापित हुआ है। यह केवल एक धर्म ध्वजा नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है। इसका भगवा रंग, इस पर अंकित सूर्यवंश की ख्याति वर्णित ऊँ शब्द और कोविदार वृक्ष राम राज्य की कीर्ति को प्रतिरूपित करता है। यह ध्वज संकल्प व सफलता का प्रतीक है। संघर्ष से सृजन की गाथा है। सदियों से चले आ रहे स्वप्नों का साकार स्वरूप है। संतों की साधना और समाज की सहभागिता की सार्थक परिणति है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष बिन्दु की साक्षी बन रही है। सम्पूर्ण भारत व विश्व राममय है। प्रत्येक राम भक्त के हृदय में अद्वितीय सन्तोष, असीम कृतज्ञता व अपार अलौकिक आनन्द है। आज सदियों की वेदना विराम पा रही है। सदियों का संकल्प सिद्धि को प्राप्त हो रहा है। आज उस यज्ञ की पूर्णाहूति हुई है, जिसकी अग्नि 500 वर्ष तक प्रज्ज्वलित रही तथा जो यज्ञ एक भी पल आस्था से नहीं डिगा, विश्वास से नहीं टूटा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाली सदियों और सहस्त्र शताब्दियों तक यह धर्मध्वज प्रभु श्रीराम के आदर्शों व सिद्धान्तों का उद्घोष करेगा। यह धर्मध्वज ‘सत्यमेव जयते’ अर्थात् सत्य की ही जीत होती है, का आवाह्न करेगा। धर्म ध्वज उद्घोष करेगा कि ‘सत्यमेव परम ब्रह्म, सत्यमेव धर्म प्रतिष्ठित’ अर्थात् सत्य ही परम ब्रह्म का स्वरूप है व सत्य में ही धर्म स्थापित है। यह धर्मध्वज हमारी प्रेरणा बनेगा। ‘रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई’ अर्थात जो कहा जाए वही किया जाए। यह धर्मध्वज संदेश देगा। ‘कर्म प्रधान विश्व रचि राखा’ अर्थात विश्व में कर्म और कर्तव्य की प्रधानता हो। धर्मध्वज कामना करेगा कि ‘बैर न बिग्रह आस न त्रासा, सुखमय ताहि सदा सब आसा’ यानी भेदभाव, पीड़ा, परेशानी से मुक्ति प्राप्त हो तथा समाज में शान्ति और सुख हो। यह हमें संकल्पित करेगा कि ‘नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना’ अर्थात् हम ऐसा समाज बनाएं, जहां गरीबी न हो तथा जहां कोई दुखी या लाचार व्यक्ति न हो।

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राचीन भारतीय ग्रन्थों में कहा गया है कि ‘आरोपितं ध्वजं दृष्ट्वा, ये अभिनन्दन्ति धार्मिकाः, ते अपि सर्वे प्रमुच्यन्ते, महा पातक कोटिभिः’ अर्थात् जो लोग किसी कारण मंदिर नहीं आ पाते, और दूर से मंदिर के ध्वज को प्रणाम कर लेते हैं, उन्हें भी उतना ही पुण्य मिल जाता है। यह धर्मध्वज भी इस मंदिर के ध्येय का प्रतीक है। यह ध्वज दूर से ही श्रीरामलला की जन्मभूमि के दर्शन कराएगा और युगों-युगों तक प्रभु श्रीराम के आदर्शां और प्रेरणाओं को मानव मात्र तक पहुंचाएगा।
प्रधानमंत्री जी ने सम्पूर्ण विश्व के करोड़ों राम भक्तों, श्रीराम मंदिर निर्माण में अपना सहयोग देने वाले श्रमवीरों, कारीगरों, योजनाकारों, वास्तुकारों का अभिनन्दन करते हुए कहा कि यह अयोध्या की वह भूमि है, जहां आदर्श आचरण में बदलते हैं। यही वह नगरी है, जहां से प्रभु श्रीराम ने अपना जीवन प्रारम्भ किया था। इसी अयोध्या ने संसार को बताया कि एक व्यक्ति कैसे समाज की शक्ति व उसके संस्कारों से पुरुषोत्तम बनता है। जब प्रभु श्रीराम अयोध्या से वनवास के लिए गए, उस समय वह युवराज राम थे। लेकिन जब लौटे तो मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम बन कर आए। उनके मर्यादा पुरुषोत्तम बनने में महर्षि वशिष्ठ का ज्ञान, महर्षि विश्वामित्र की दीक्षा, महर्षि अगस्त्य का मार्गदर्शन, निषाद राज की मित्रता, मां शबरी की ममता, भक्त हनुमान का समर्पण की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में भी समाज की इसी सामूहिक शक्ति की आवश्यकता है। प्रभु श्रीराम मंदिर का दिव्य प्रांगण भारत के सामूहिक सामर्थ्य की चेतना स्थली बन रहा है। यहां सप्त मन्दिर बने हैं, जिनमें माता शबरी का मंदिर जनजातीय समाज के प्रेम भाव और आतिथ्य परम्परा की प्रतिमूर्ति है। निषाद राज का मंदिर उस मित्रता का साक्षी है, जो साधन नहीं साध्य की भावना को पूजती है। यहां एक ही स्थान पर माता अहिल्या, महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य और संत तुलसीदास जी हैं। श्रीरामलला के साथ-साथ इन सभी ऋषियों के दर्शन यहां पर होते हैं। यहां जटायु जी और गिलहरी की मूर्तियां भी है, जो बड़े संकल्पों की सिद्धि के लिए प्रत्येक छोटे से छोटे प्रयास के महत्व को दर्शाती हैं।

प्रधानमंत्री जी ने देशवासियों का आवाह्न करते हुए कहा कि आप जब भी श्रीराम मन्दिर आए तो सप्तम मन्दिर के दर्शन अवश्य करें। यह मन्दिर हमारी आस्था के साथ-साथ मित्रता, कर्तव्य और सामाजिक सद्भाव के मूल्यों को भी शक्ति देते हैं। हमारे श्रीराम भेद से नहीं भाव से जुड़ते हैं। उनके लिए व्यक्ति का कुल नहीं उसकी भक्ति महत्वपूर्ण है। उन्हें वंश नहीं मूल्य प्रिय हैं। उन्हें शक्ति नहीं सहयोग महान लगता है। आज हम भी उसी भावना से आगे बढ़ रहे हैं। विगत 11 वर्षों में महिला, दलित, पिछड़े, अति पिछड़े, आदिवासी, वंचित, किसान, श्रमिक, युवा सहित प्रत्येक वर्ग को विकास के केन्द्र में रखा गया है। जब देश का प्रत्येक व्यक्ति, वर्ग, क्षेत्र सशक्त होगा, तब संकल्प की सिद्धि में सबका प्रयास लगेगा। जब वर्ष 2047 में देश आजादी के 100 वर्ष पूर्ण होने का उत्सव मना रहा होगा, तब तक हमें सम्मिलित प्रयास से विकसित भारत का निर्माण करना होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि श्रीराम सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, वह मूल्य, मर्यादा व दिशा हैं। यदि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित तथा समाज को सामर्थ्यवान बनाना है, तो हमें अपने अन्दर ‘श्रीराम’ को जगाना होगा। अपने अन्दर श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा करनी होगी। इस संकल्प के लिए आज से बेहतर दिन और क्या हो सकता है। 25 नवम्बर का यह ऐतिहासिक दिन अपनी विरासत पर गर्व करने का एक और अद्भुत क्षण लेकर आया है। इसकी वजह है, धर्मध्वजा पर अंकित कोविदार वृक्ष। यह वृक्ष इस बात का उदाहरण है कि जब हम अपनी जड़ों से कट जाते हैं, तो हमारा वैभव इतिहास के पन्नों में दब जाता है।
प्रधानमंत्री जी ने कहा कि जब भरत अपनी सेना के साथ चित्रकूट पहुंचे, तो लक्ष्मण ने दूर से ही अयोध्या की सेना को पहचान लिया। यह कैसे हुआ, इसका वर्णन वाल्मीकि जी ने करते हुए उल्लिखित किया है कि ‘विराजति उद्गत स्कन्धम्, कोविदार ध्वजः रथे’ अर्थात् लक्ष्मण कहते हैं कि ‘हे राम, सामने जो तेजस्वी प्रकाश में विशाल वृक्ष जैसा ध्वज दिखाई दे रहा है, वही अयोध्या की सेना का ध्वज है, उस पर कोविदार का शुभ चिन्ह अंकित है।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु के उत्तरी हिस्से में स्थित उत्तरमेरूर गांव में हज़ारों वर्ष पहले का एक शिलालेख है। उसमें उल्लिखित है कि उस कालखण्ड में भी कैसे लोकतांत्रिक तरीके से शासन व्यवस्था चलती थी तथा लोग सरकार कैसे चुनते थे। लेकिन हमारे यहां तो मैग्ना कार्टा की प्रशंसा का ही चलन रहा। यहां भगवान बसवन्ना, उनके अनुभव मंटपा की जानकारी भी सीमित रखी गई। अनुभव मंटपा अर्थात् जहां सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक विषयों पर सार्वजनिक बहस होती थी। जहां सामूहिक सहमति से निर्णय लिए जाते थे। लेकिन गुलामी की मानसिकता के कारण भारत की अनेक पीढ़ियों को इस जानकारी से वंचित रखा गया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब से प्रभु श्रीराम मन्दिर में प्राण प्रतिष्ठा हुई है, तब से आज तक करीब-करीब पैंतालीस करोड़ श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आ चुके हैं। यह वह पवित्र भूमि है, जहां पैंतालीस करोड़ लोगों के चरण रज पड़े हैं। इससे अयोध्या और आसपास के लोगों की आय में आर्थिक परिवर्तन व वृद्धि हुई है। कभी अयोध्यानगरी विकास के पैमानों में बहुत पीछे थी, आज यह प्रदेश के अग्रणी शहरों में से एक बन रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का आने वाला समय बहुत महत्वपूर्ण है। आजादी के बाद के 70 वर्षों में भारत विश्व की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना, लेकिन विगत 11 वर्षों में ही भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। वह दिन दूर नहीं, जब भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक डॉ0 मोहनराव भागवत ने कहा कि आज हम सभी के लिए यह सार्थकता का दिवस है। इस दिन के लिए अनेक लोगों ने सपना देखा, प्रयास किये तथा अपना बलिदान दिया। आज प्रभु श्रीराम मन्दिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। रामराज्य का जो ध्वज पहले अयोध्या में फहराता था और सम्पूर्ण विश्व में अपने आलोक से सुख-शान्ति प्रदान करता था, हम सभी ने उस ध्वज को आज फिर से प्रभु श्रीराम के मन्दिर के शिखर पर विराजमान होते हुए अपनी आंखों से देखा है। हमें सम्पूर्ण दुनिया को ओंकार से प्रतिनिधित होने वाले सत्य को प्रदान करने वाला, परम वैभव व सर्वशक्ति सम्पन्न, सबको खुशी और उन्नति बांटने वाला तथा विकास के सुफल प्रदान करने वाला भारतवर्ष खड़ा करना है। यह विश्व की अपेक्षा और हमारा कर्तव्य है। प्रभु श्रीराम मन्दिर में हमारे इस संकल्प के प्रतीक की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गयी है। हमें यह संकल्प हमारे पूर्वजों ने दिया है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक ने कहा कि सम्पूर्ण दुनिया में धर्म, ज्ञान तथा सुफल बांटने वाले भारत की शुरूआत हो चुकी है। इस ध्वज प्रतीक को देखकर दृढ़तापूर्वक सतत् प्रयास करते हुए सभी प्रकार की विपरीतताओं के पश्चात भी हम सबको मिलकर इस भारत का निर्माण करना पड़ेगा। ‘एतद् देश प्रसूतस्य शकासाद् अग्रजन्मनः, स्वं-स्वं चरित्रं शिक्षरेन् पृथ्वियां सर्व मानवः’ अर्थात भारत में जन्मे हमारे अग्र्रजों ने अपने उत्तम चरित्र की शिक्षा व जीवन की विद्या पृथ्वी के समस्त मानवों को प्रदान की।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रभु श्रीराम का यह भव्य मन्दिर 140 करोड़ भारतीयों की आस्था, सम्मान और आत्मगौरव का प्रतीक है। अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम के भव्य मन्दिर पर ध्वजारोहण एक नये युग का शुभारम्भ है। यह केसरिया ध्वज धर्म, मर्यादा, सत्य, न्याय, राष्ट्र धर्म तथा विकसित भारत की संकल्पना का प्रतीक है। आज का यह पावन दिन उन श्रीराम भक्तों, पूज्य सन्तों, योद्धाओं की अखण्ड साधना व संघर्ष को समर्पित है, जिन्होंने श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। विवाह पंचमी का यह दिव्य संयोग इस उत्सव को और अधिक पावन बना रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि ‘आजु सफल तपु तीरथ त्यागू, आजु सुफल जप जोग बिरागू, सफल सकल सुभ साधन साजू, राम तुम्हहि अवलोकत आजू’ अर्थात् हे प्रभु श्रीराम, आपका दर्शन करते ही आज मेरा तप, तीर्थ सेवन, त्याग, जप, योग, वैराग्य तथा सम्पूर्ण शुभ साधनों का समुदाय सफल हो गया है। ध्वजारोहण उस सत्य का उद्घोष है कि धर्म का प्रकाश अमर है और रामराज्य के मूल्य कालजयी हैं। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा पद ग्रहण के प्रथम दिन से ही कोटि-कोटि भारतवासियों के मन में जिस सम्भावना, संकल्प और विश्वास का सूर्योदय हुआ, आज वह साकार होकर इस भव्य श्रीराम मन्दिर के रूप में सभी देशवासियों व सनातन धर्मावलम्बियों के समक्ष स्थित है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां धर्म पथ, राम पथ, भक्ति पथ, पंचकोसी, चौदहकोसी व चौरासीकोसी परिक्रमा श्रद्धालुओं और भक्तों की आस्था को सम्मान प्रदान कर रही है। यहां महर्षि बाल्मीकि के नाम पर स्थापित अन्तरराष्ट्रीय एयरपोर्ट राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर कनेक्टिविटी की सुविधा उपलब्ध करा रहा है। हम इस नयी अयोध्या का दर्शन देश की पहली सोलर सिटी व सस्टेनेबल स्मार्ट सिटी के रूप में कर रहे हैं। इस अवसर पर साधु-संत सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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