शिक्षक ही गढ़ते हैं बच्चों के जीवन की दिशा – डॉ. वर्णिका शर्मा

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*मोर मयारू गुरूजी कार्यक्रम में शिक्षकों को बाल अधिकारों के प्रति किया गया जागरूक*

रायपुर, / छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में ’’मोर मयारू गुरूजी’’ कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर रायपुर जिले के 77 शिक्षकों ने सहभागिता की और बाल अधिकारों के संरक्षण, बच्चों के मानसिक विकास एवं शिक्षकों की भूमिका पर गहन विमर्श हुआ।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा, जब बच्चा पांच वर्ष का होता है, तब माता-पिता उसे शिक्षकों के हवाले कर देते हैं। इसके बाद उसके जीवन की दिशा और सोच को आकार देने का कार्य शिक्षक करते हैं। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे इस भूमिका को पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ निभाएं। डॉ. शर्मा ने कहा कि यह कार्यक्रम सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, बल्कि एक मिशन है, जिसका उद्देश्य है बच्चों को सशक्त, आत्मविश्वासी और नैतिक नागरिक के रूप में गढ़ना। उन्होंने आयोग द्वारा ऐसे रुचिकर एवं प्रेरणात्मक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए पूरी टीम को साधुवाद दिया।

कार्यक्रम में आयोग के सचिव श्री प्रतीक खरे ने प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि किस प्रकार एक शिक्षक के व्यवहार, संवेदना और दृष्टिकोण का गहरा प्रभाव बच्चों के चरित्र निर्माण पर पड़ता है। उन्होंने बच्चों की सहभागिता, शोषण से सुरक्षा और व्यक्तित्व विकास के अधिकारों को समझाने के लिए शिक्षकों से संवाद किया।

’’मैं तो तोर छाया हरव’’ यह भावपूर्ण उद्घोष कार्यक्रम की आत्मा बनकर सामने आया, जिसमें यह संदेश छिपा है कि शिक्षक अपने शिष्य के लिए सिर्फ मार्गदर्शक नहीं, बल्कि एक छाया की तरह रक्षक भी होता है।

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