ठेका मजदूर यूनियन की बैठक में सत्याग्रह अभियान चलाने का निर्णय

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 ठेका मजदूरों को मिले ग्रेच्युटी,  24 अप्रैल दिल्ली सम्मेलन में जाएंगे मजदूर प्रतिनिधि

सोनभद्र।  ओबरा तापीय परियोजना समेत सभी उद्योगों में 60 वर्ष की आयु में रिटायर किए जा रहे ठेका मजदूरों को ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम 1972 के प्रावधानों के अनुसार प्रबंधन को ग्रेच्युटी का तत्काल भुगतान करना चाहिए। यह मांग आज ओबरा कार्यालय पर ठेका मजदूर यूनियन की बैठक में उठी। बैठक में ठेका मजदूरों की इस मांग और रोजगार, सामाजिक व जीवन सुरक्षा न्यूनतम वेतन का वेज रिवीजन के सवालों पर बड़े पैमाने पर हस्ताक्षर अभियान चलाने का निर्णय हुआ। बैठक की अध्यक्षता ठेका मजदूर यूनियन के जिलाध्यक्ष तीरथ राज यादव और संचालन संयुक्त मंत्री मोहन प्रसाद ने किया। बैठक में कहा गया की जनपद में उद्योगों का प्रबंध तंत्र व शासन-प्रशासन ठेका मजदूरों के साथ विधि के अनुरूप व्यवहार नहीं कर रहा है। ग्रेच्युटी एक्ट में विधिक अधिकार होने के बावजूद पूरी जिंदगी एक ही जगह काम करने वाले ठेका मजदूरों को रिटायर होने पर ग्रेच्युटी नहीं दी जा रही है। मजदूरों को महीने में मात्र 14 दिन काम देने की जबरन कार्रवाइयां हो रही है। हाईकोर्ट के आदेश और कारखाना अधिनियम के कानून के बाद भी मजदूरों को जीवन सुरक्षा उपकरण प्राप्त नहीं है। पिछले 10 सालों से प्रदेश में न्यूनतम वेतन का वेज रिवीजन नहीं किया गया। नए लेबर कोड में मजदूरों के कानूनी अधिकार भी छीन लिए गए है। इस स्थिति में कानून की राज की स्थापना के लिए यूनियन सत्याग्रह अभियान चलाएगी।

बैठक में भारत के की विदेश व व्यापार नीति तथा कृषि, ऊर्जा और खाद्यान्न संकट पर दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में मजदूर प्रतिनिधियों के शामिल होने का निर्णय हुआ। कहा गया कि मोदी सरकार की नीतियों के कारण भारत दुनिया में अलग-थलग पड़ गया है। अमेरिका खेमे से जुड़ने के कारण मित्र देशों से हमारे संबंध बेहद खराब हो गए। परिणाम स्वरुप हमें तेल, गैस और ऊर्जा के भीषण संकट का सामना करना पड़ रहा है। हमारे कृषि, छोटे-मझोले उद्योग, व्यापार व बाजार तबाह हो गए हैं। आम आदमी बेरोजगारी और महंगाई की मार झेल रहा है। ऐसे में यह राष्ट्रीय सम्मेलन अति महत्वपूर्ण राजनीतिक हस्तक्षेप है। जिसमें शामिल होने और सहयोग करने की अपील भी की गई। बैठक में आदित्य नारायण सिंह, अरविंद कुमार, खुर्शीद खान, जगन्नाथ मिश्रा, विनोद कुमार जायसवाल, रामविलास चैहान, नबी उल्लाह, रेखा देवी, दयाशंकर पांडे, रामाशीष यादव, अवधेश मौर्य, नूर मोहम्मद, मोहनलाल, केवल प्रसाद पाठक, निरहू राम आदि सैकड़ो मजदूर शामिल रहे।

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