लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के कार्यां की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश के अवस्थापना और शहरी विकास कार्यों को नए स्तर पर ले जाया जाए। वरिष्ठ अधिकारी केवल फाइलों तक सीमित न रहें, बल्कि धरातल पर उतरकर परियोजनाओं की प्रगति देखें और जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पारदर्शी व्यवस्था के अन्तर्गत कार्यों को आगे बढ़ाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास प्राधिकरण मास्टर प्लान बनाते समय चयन प्रक्रिया को वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाएं, ताकि योजनाएं व्यवहारिक तौर पर धरातल पर उतर सकें। उन्होंने अधिकारियों को अल्प अवधि, मध्य अवधि और दीर्घकालिक योजनाएं बनाकर विकास परियोजनाओं को समग्रता के साथ आगे बढ़ाये जाने के निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि मेरठ, कानपुर एवं मथुरा-वृन्दावन के समग्र विकास हेतु 1,833 करोड़ रुपये की लागत से 38 परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें मेरठ में 11, कानपुर में 13 और मथुरा वृन्दावन में 14 परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने निर्देश दिये कि हर प्रस्ताव को स्थानीय स्तर पर सर्वे और अध्ययन के बाद ही अंतिम रूप दिया जाए, ताकि योजनाएं क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप हों और जनता को इनका वास्तविक लाभ मिल सके।
मुख्यमंत्री ने राजधानी लखनऊ में प्रस्तावित 28 किलोमीटर ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के सम्बन्ध में कहा कि राजधानी में संचालित विभिन्न परियोजनाओं को आपस में जोड़ने से आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रीन कॉरिडोर और अन्य अवस्थापना परियोजनाओं के लिए आवश्यक निधि निवेश ऋण के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए, ताकि कार्य समयबद्ध ढंग से पूरे किए जा सकें।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि सभी परियोजनाओं को विभागीय कन्वर्जेंस के माध्यम से धरातल पर उतारा जाए। विकास प्राधिकरण ऐसी परियोजनाएं तैयार करें, जो राष्ट्रीय स्तर पर मॉडल साबित हों और प्राधिकरण की आय का स्रोत भी बनें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास प्राधिकरण केवल निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने के लिए नवाचार करें।
मुख्यमंत्री ने विकास प्राधिकरणों को अपने बॉन्ड जारी करने के निर्देश देते हुए कहा कि इससे न केवल प्राधिकरणों की आय बढ़ेगी, बल्कि उनकी कार्यकुशलता और पारदर्शिता पर जनता का विश्वास भी सशक्त होगा। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि उत्तर प्रदेश के विकास प्राधिकरण अपनी योजनाओं को ब्राण्ड बनाएं और अन्य राज्यों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करें।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि प्राधिकरण किसी भी भवन का नक्शा तभी पास करें, जब उसमें रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था सुनिश्चित हो। भविष्य की आवश्यकताओं और जल संकट की गम्भीरता को देखते हुए यह व्यवस्था अनिवार्य है और इसे हर हाल में लागू कराया जाए। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पी0पी0पी0 मॉडल पर कन्वेंशन सेण्टर का निर्माण कराया जाए। साझा राजस्व के आधार पर प्राधिकरण भूमि उपलब्ध कराए और निवेशक इसका निर्माण व संचालन करें। इससे प्रदेश को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी और निवेश का वातावरण और बेहतर होगा।

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