चिरौजी के विलुप्त हो रहे पौधों को पुनः लगाने  हेतु टिशुकल्चर पौध उपलब्ध कराने का निर्देश

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सोनभद्र। जिलाधिकारी बी0एन0 सिंह के मार्गदर्शन में जनपद सोनभद्र से विलुप्त हो रहे चिरौजी (चार) के वृक्षों का मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी ने शुक्रवार को ग्राम परसौना, तेन्दूहार, कन्न्हारी, लॉली, उम्भा, इमलीपोखर, मुर्तिया व पेढ़ के किसानों से ग्राम परसौना में चिरौजी के पौधों को पुनरूद्धार करने हेतु  बात-चीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि चिरौजी के विलुप्त हो रहे पौधों को पुनः लगाने एवं प्रसंस्करण (मशीन) आदि हेतु जिला उद्यान अधिकारी, सोनभद्र को निर्देशित किया गया तथा कृषकों को उन्न्तशील पौधें एवं मशीन उपलब्ध कराने हेतु निर्देश दिया गया तथा कृषकों के बात-चीत करते हुए संज्ञान में आया कि चिरौजी के फल से बीज निकालने एवं उनके विपणन आदि की समुचित व्यवस्था न होने के कारण कृषकों से कम दामों पर विचौलियों द्वारा चिरौजी के फल खरीद लिए जाते है।
   कृषकों तथा फल इकठ्ठा करने वाले व्यक्तियों को उचित मूल्य नही मिल पाता है, कृषकों द्वारा बताया गया कि फल इकठ्ठा करने के बाद फल से चिरौजी बीज निकालने में बहुत ही कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इसी क्रम में मुख्य विकास अधिकारी द्वारा प्रदर्शन के तौर पर एक मशीन उपलब्ध कराने हेतु जिला उद्यान अधिकारी को निर्देशित किया गया तथा स्थानीय लोगों से बाहर के विचौलियों को फल न बेचने हेतु की सलाह दी। उन्होंने कहा कि चिरौजी के बीज से तैयार पौध पर फल लगभग 7-8 वर्ष बाद आते है, इसको देखते हुए कृषकों को आगामी अगस्त माह में टिशुकल्चर पौध उपलब्ध कराने हेतु जिला उद्यान अधिकारी को निर्देशित किया गया। टिशुकल्चर पौध से 5 वर्ष बाद ही फल आना प्रारम्भ हो जाता है। कृषक चिरौजी के पौध अपने खेत अथवा मेड़ों पर लगागर अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते है।

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