पंचतत्वों का संरक्षण और बड़ों का आदर छात्र जीवन का सम्बल : यमुना पुरी

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प्रयागराज। [मनोज पांडेय] सरस्वती विद्या मन्दिर, सर्वोदय नगर, अल्लापुर, प्रयागराज में आज नये सत्र का शुभारम्भ महन्त यमुना पुरी महाराज, सचिव महानिर्वाणी अखाड़ा के आशीर्वचन से प्रारम्भ हुआ। महन्त ने दीप प्रज्वलन और प्रभू का पूजन किया। उन्होंने भैया-बहनों को शुभाशीष देते हुये कहा कि प्रत्यक्ष देव भगवान भाष्कर की प्रातःकाल दर्शन करने से ऊर्जा प्राप्त होती है जो हमारे मस्तिष्क और शरीर को स्वस्थ, सौष्ठव एवं यशवान बनाता है। जल के सदुपयोग एवं आवश्यकतानुसार खर्च पर बल दिया और कहा कि जल और वायु मानव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण तत्व हैं। जल का अपव्यय रोककर उसका संरक्षण और संवर्धन करिये तथा पर्यावरण को संरक्षित कर वातावरण को शुद्ध रखिये, जिससे हमें श्वाँस लेने में अधिकाधिक आक्सीजन प्राप्त हो, जिससे मन केन्द्रित रहे। महाराज ने भैया-बहनों को योग-व्यायाम भी करने की सलाह दी।

समाज में पाश्चात्य संस्कृति से बचकर अपनी सनातन संस्कृति को सम्मान देने पर बल दिया। शिक्षा में कठिन परिश्रम के द्वारा अपने लक्ष्य की प्राप्ति करने का टिप्स दिया और माता-पिता और गुरुजन का आदर कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने को श्रेष्ठ बताया। भैया-बहनों पर पुष्प वर्षा कर शुभाशीष देकर उज्ज्वल भविष्य की कामना किया। भारतीय सांस्कृतिक परिषद के महानगर अध्यक्ष सतीश कुमार गुप्त ने महन्त का अभिनन्दन किया एवं भैया-बहनों को नये सत्र के प्रारम्भ पर अपनी मंगलकामनायें दीं। विद्यालय के प्रधानाचार्य सुरेश चन्द्र तिवारी ने विद्यालय परिवार एवं प्रबन्ध समिति की ओर से पूज्य महन्त यमुना पुरी का माल्यार्पण कर अंगवस्त्रम, श्री फल , श्री रामचरितमानस एवं महर्षि भरद्वाज मुनि का चित्र भेंट कर अभिनन्दन किया। अभिषेक दुबे एवं सतीश कुमार गुप्त ने महन्त को अयोध्याधाम में विराजमान प्रभु श्रीराम चन्द्र का फोटो भेंट कर अभिनन्दन किया। शुभाशीष कार्यक्रम के उपरान्त महन्त ने सम्पुट पाठ का उद्बोधन कर सुन्दर काण्ड को प्रारम्भ किया। सुन्दरकाण्ड का पाठ एवं हवन के साथ नये सत्र के पठन-पाठन का श्री गणेश हुआ।

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