अधिवक्ता मध्यस्थों के 40 घंटे के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान में शुभारंभ

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सर्वोच्च न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति के पाठ्यक्रम पर 68 अधिवक्ता मध्यस्थ हो रहे प्रशिक्षित

रचनात्मक संवाद और सुलह-समझौते के जरिए विवादों के सौहार्दपूर्ण व त्वरित समाधान पर दिया जा रहा बल

उद्घाटन अवसर पर वरिष्ठ मास्टर ट्रेनर नीरज उपाध्याय व रोहित उपाध्याय की पुस्तक ‘मध्यस्थता वकालत’ का हुआ विमोचन

लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति अरुण भंसाली तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा के कुशल मार्गदर्शन में सोमवार को 40 घंटे के विशेष मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा आयोजित यह पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 02 से 06 नवम्बर 2026 तक न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (जेटीआरआई), गोमती नगर, लखनऊ में संचालित किया जा रहा है। इसमें प्रदेश के विभिन्न जनपद न्यायालयों में कार्यरत 68 चयनित अधिवक्ता मध्यस्थ प्रतिभाग कर रहे हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम भारत के सर्वोच्च न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (एमसीपीसी) द्वारा निर्धारित मानक व सुव्यवस्थित पाठ्यक्रमानुसार आयोजित किया जा रहा है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव डॉ. (श्रीमती) मनु कालिया तथा न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, लखनऊ की निदेशक रेखा अग्निहोत्री की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस विशेष प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य अधिवक्ता मध्यस्थों को प्रभावी मध्यस्थता, सुलह-समझौते और विवादों के सौहार्दपूर्ण निस्तारण हेतु आवश्यक विधिक ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल प्रदान करना है, जिससे उत्तर प्रदेश में वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, प्रभावी व जनसुलभ बनाया जा सके।

प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई है कि प्रतिभागी अधिवक्ताओं को मध्यस्थता की बारीकियों, तकनीकी पहलुओं और आधुनिक व्यावहारिक दृष्टिकोण से भली-भांति अवगत कराया जा सके। इससे वे विवादित पक्षकारों के मध्य सकारात्मक व रचनात्मक संवाद स्थापित कराने, उनके साझा हितों एवं सहमति के बिंदुओं की पहचान करने तथा परस्पर स्वीकार्य व न्यायसंगत समाधान तक पहुंचने में कुशल मध्यस्थ की भूमिका निभा सकें।

उद्घाटन सत्र के दौरान एमसीपीसी के वरिष्ठ मास्टर ट्रेनर व अधिवक्ता नीरज उपाध्याय तथा अधिवक्ता व मध्यस्थ रोहित उपाध्याय द्वारा लिखित पुस्तक ‘मध्यस्थता वकालत’ (मेडिएशन एडवोकेसी) का विधिवत विमोचन भी किया गया। यह पुस्तक विवादों को सुलझाते समय रचनात्मक सोच, संवेदनशीलता और आपसी सहयोग की भावना को अपनाने की महत्ता को व्यावहारिक रूप से रेखांकित करती है। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण इस प्रकार के संस्थागत प्रशिक्षणों के माध्यम से आम नागरिकों को त्वरित, सुलभ और किफायती न्याय सुनिश्चित कराने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।

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