शहीद स्थल करारी व सोनभद्र बार एसोसिएशन साहित्य प्रकोष्ठ के संयुक्त संयोजन में काव्य संध्या का आयोजन
सोनभद्र। शहीद स्थल करारी व सोनभद्र बार एसोसिएशन साहित्य प्रकोष्ठ के संयुक्त संयोजन में बार सभागार कचहरी में शनिवार को काव्य संध्या का आयोजन लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया। काव्य मंच के अध्यक्ष वरिष्ठ कवि ईश्वर विरागी, दिवाकर द्विवेदी मेघ, अजय चतुर्वेदी कक्का व बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव एड महामंत्री योगेश कुमार द्विवेदी ने सरस्वती व पटेल के चित्र पर माल्यार्पण कर आयोजन को गति दिया।
वाणी वंदना करते हुये आयोजक प्रदुम्न त्रिपाठी ने, तम हर जग माँ जगमग कर दे, से आरंभ कर अपनी रचना, फिर से हमें पटेल चाहिए, आतंकियों पर नकेल चाहिए, राष्ट्र अखंडता रहे सुरक्षित, अपराधियों को जेल चाहिए सुनाकर रोमांच भर दिये सराहे गये। ओज व श्रृंगार की सशक्त कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान शिक्षक ने, जिंदगी में सफल है वहीं आदमी, जिसके मन में भरा प्रेम का भाव है, सशक्त रचना से ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय कबीर की वाणी को अभिव्यक्ति दी सराही गयीं।राष्ट्रवाद के सजग प्रहरी धर्मेश चौहान एड ने मुखर स्वर से देश को नमन करते हुए, देश से कुछ भी बड़ा नहीं इंसान के लिए, तन मन हमारा अर्पित हिंदुस्तान के लिए सुनाकर जागरण किये और वाहवाही लूटी।
ओज के सशक्त हस्ताक्षर प्रभात सिंह चंदेल ने, महंगाई पर सत्ता को नसीहत देती रचना, सरहदों के पार हुई चीनी घुसपैठ, मीठी वाली चीनी अब मुंह है चिढ़ाने लगी सुनाकर गतिज उर्जा दिये। संचालक अशोक तिवारी ने शाइरी करते हुए, जो न होता हमें बेसहारों का ख्याल, हम आसमां के बराबर जमीं पर होते सुनाकर संवेदना झंकृत किये। दिवाकर दिवेदी मेघ ने, बडा़ मुश्किल समझना और समझाना जमाने को, सभी बेताब हैं सबको यहाँ नीचे झुकाने को सुनाकर समाज की विद्रूपता को अभिव्यक्ति दिये। दिलीप सिंह दीपक गीतकार ने, आंधियों का है समय तूफान थमना शेष है, है घनेरा तम मगर सूरज निकलना शेष है सुनाकर, आम आदमी की पीर उकेरा। विवेक चतुर्वेदी ने गजल, कता नज्म सुनाया तो वहीं मदन चौबे एड ने मुक्त छंद से जन रंजन किया और लोगों को सोचने पर दिवस किये। विनोद कुमार सिंह शिक्षक ने अपनी रचना नवगीत के माध्यम से लोगों को भावुक कर दिये, उनकी रचना, जग दृष्टा बन मैं पहचानूँ निश्छल मन में वेग तुम्हारा, स्वयं जिसे मैं समझ रहा वहीं छिपा है प्रेम तुम्हारा सराही गयी। दयानंद दयालू ने दहेज पर कविता, देखा बाबू पढ़ल लिखल उल्टा समाज के, कवन बा ईलाज एह बिगड़ल मिजाज के सुनाकर कल्पना शक्ति को बल दिया। सुधाकर स्वदेशप्रेम ने, तिरंगे में सजे अर्थी बजे धुन राष्ट्र गीतों की, जनाजा जब मेरा निकले वतन के वास्ते निकले सुनाकर कवि मन को धार दिये।
गायक सुशील मिश्रा ने ,धनि धनि पटेल जी भारत के ललनवां, जै जै हिंदुस्तान गूंजै जगमग गगनवां , सस्वर गाकर चार चांद लगाये। राकेश शरण मिश्र एड ने प्रथम गृह मंत्री लौहपुरुष सरदार पटेल को समर्पित समसामयिक सारगर्भित सशक्त रचना पाठ से पूरी महफ़िल लूट लिया और उनके कृतित्व व्यक्तित्व का मूल्यांकन कर नमन् किये।अंत में अध्यक्षता करते हुए ईश्वर विरागी थाम लेंगे वक्त को चलने न देंगे,ऐ हिंद हम तुझको कभी झुकने न देंगे कालजयी रचना सुनाकर अमिट छाप छोड़ गये। हास्य व्यंग्य के वरिष्ठ कवि अजय चतुर्वेदी कक्का ने राजनीति पर मारक रचना, खूब फुटानी छांट रही है, राजनीति हमें बांट रही है, सपा ने चंदन पोछवाया, भाजपा चुंडी काट रही है सुनाकर वाहवाही लूटी। प्रेमी बौद्ध ने भी काव्य पाठ किया।आभार ऋषभ त्रिपाठी ने व्यक्त किया। इस अवसर पर संदीप कुमार शुक्ल जयशंकर त्रिपाठी देवानंद पांडेय गोपाल बंगाली त्रिपुरारी मिश्रा प्रदीप कुमार सिंह ठाकुर कुशवाहा फारुख अली हाश्मी गुलाम हुसैन हर्ष चौहान राधा प्रसाद चौहान अजीत शुक्ल आदि देर शाम तक जमे रहे।
