12वीं के छात्र सिद्धार्थ त्रिपाठी का टेकफेस्ट के लिए चयन, चार अक्तूबर को वैज्ञानिकों के सामने देंगे प्रेजेंटेशन
गाँव गिरांव

हवा में बढ़ते प्रदूषण के बीच स्वच्छ वायु के लिए वैज्ञानिक समाधान तलाश रहे चंदौली के एक होनहार छात्र ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यूनिवर्सल पब्लिक स्कूल के कक्षा 12 के छात्र सिद्धार्थ त्रिपाठी को आईआईटी बॉम्बे के प्रतिष्ठित टेकफेस्ट में अपने वैज्ञानिक मॉडल का प्रेजेंटेशन देने के लिए आमंत्रित किया गया है। सिद्धार्थ चार अक्तूबर को कोल्ड प्लाज्मा तकनीक आधारित वायु शोधन मॉडल को आईआईटी बॉम्बे के मंच पर प्रस्तुत करेंगे।सिद्धार्थ का प्रोजेक्ट वायु को शुद्ध करने के लिए कोल्ड प्लाज्मा तकनीक के इस्तेमाल पर आधारित है।
इस तकनीक में अपेक्षाकृत कम तापमान पर विद्युत ऊर्जा के माध्यम से प्लाज्मा उत्पन्न किया जाता है। इससे बनने वाली सक्रिय रासायनिक प्रजातियां हवा में मौजूद कुछ प्रदूषकों के साथ प्रतिक्रिया कर सकती हैं और उन्हें कम हानिकारक पदार्थों में बदलने में मदद कर सकती हैं।इस शोध का प्रमुख उद्देश्य केवल हवा में मौजूद प्रदूषकों को कम करना ही नहीं, बल्कि ऐसी प्रक्रिया की संभावनाओं को तलाशना है जिससे वायु शोधन के दौरान पर्यावरण पर अतिरिक्त प्रतिकूल प्रभाव कम से कम हो। यही वैज्ञानिक दृष्टिकोण सिद्धार्थ के प्रोजेक्ट को पर्यावरण और तकनीक से जोड़ता है।
बड़े वैज्ञानिक मंच पर रखेंगे अपनी सोच
आईआईटी बॉम्बे का टेकफेस्ट विज्ञान, तकनीक और नवाचार से जुड़े विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए बड़ा मंच है। विद्यालय परिवार के अनुसार, आयोजन में करीब दो लाख शोधार्थियों और प्रतिभागियों के शामिल होने की बात कही जा रही है। ऐसे मंच पर स्कूली छात्र को अपने वैज्ञानिक मॉडल के प्रदर्शन का अवसर मिलना विद्यालय के साथ ही जिले के लिए भी गौरव की बात है।सिद्धार्थ अब विशेषज्ञों और शोधार्थियों के सामने अपने मॉडल की कार्यप्रणाली, कोल्ड प्लाज्मा की वैज्ञानिक अवधारणा और वायु शोधन में इसके संभावित उपयोग को प्रस्तुत करेंगे। इससे उन्हें अपने प्रोजेक्ट पर विशेषज्ञों की राय और वैज्ञानिक सुझाव प्राप्त करने का अवसर भी मिलेगा।
विद्यालय परिवार के राजकुमार तिवारी ने कहा कि सिद्धार्थ का आईआईटी बॉम्बे में प्रेजेंटेशन के लिए चयन होना पूरे विद्यालय परिवार के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और शोध के प्रति रुचि बढ़ाने का काम करेगी।सिद्धार्थ के चयन की जानकारी के बाद विद्यालय में उत्साह का माहौल है। शिक्षक और विद्यार्थी उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं। अब चार अक्तूबर को आईआईटी बॉम्बे के मंच पर चंदौली के इस युवा वैज्ञानिक की सोच और उसका कोल्ड प्लाज्मा आधारित मॉडल विशेषज्ञों के सामने होगा।
ऐसे काम कर सकता है सिद्धार्थ का कोल्ड प्लाज्मा मॉडल
कोल्ड प्लाज्मा को सरल भाषा में ऐसी आयनीकृत गैस के रूप में समझा जा सकता है, जिसमें इलेक्ट्रॉनों को पर्याप्त ऊर्जा मिलती है, जबकि पूरी गैस का तापमान पारंपरिक गर्म प्लाज्मा की तरह बहुत अधिक नहीं होता। विद्युत क्षेत्र के प्रभाव से सक्रिय कण और रासायनिक प्रजातियां बनती हैं। ये हवा में मौजूद कुछ प्रदूषकों के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया कर उनके उपचार में मदद कर सकती हैं।खास बात: वायु शोधन के क्षेत्र में इस तकनीक पर शोध का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रदूषकों को नियंत्रित करने के साथ-साथ ऊर्जा की खपत और संभावित उप-उत्पादों को भी ध्यान में रखा जाए। सिद्धार्थ का प्रोजेक्ट इसी वैज्ञानिक चुनौती पर केंद्रित है।
