अंतर्राष्ट्रीय साइबर ठग चंदौली से गिरफ्तार

Spread the love

जापान में बजता था फोन, यहां बैठकर खाते पर लगाते थे सेंध

कंप्यूटर के सामने बैठे ठग, बुजुर्गों को तकनीकी मदद का झांसा देकर लेते थे रिमोट एक्सेस


मुगलसराय में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के कॉल सेंटर का भंडाफोड़, पांच गिरफ्तार; नौ लाख रुपये फ्रीज

गाँव गिरांव /चंदौली

कमरे में कंप्यूटरों की कतार, कानों पर हेडफोन और स्क्रीन पर जापान के नागरिकों से चल रही बातचीत… बाहर से देखने पर सबकुछ किसी सामान्य कॉल सेंटर जैसा था। लेकिन इन कंप्यूटरों के पीछे बैठी टीम तकनीकी मदद नहीं, बल्कि जापान के बुजुर्गों के बैंक खातों तक पहुंच बनाने में जुटी थी। कैलाशपुरी में तीसरी मंजिल पर चल रहे इस अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के कॉल सेंटर का पुलिस ने भंडाफोड़ कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, गिरोह जापानी बुजुर्गों को फोन कर खुद को कंप्यूटर या बैंक का तकनीकी कर्मचारी बताता था। कंप्यूटर में खराबी का डर दिखाकर पीड़ित को एक वेबसाइट खोलने और छह अंकों का पिन डालने के लिए कहा जाता था। पिन डालते ही ठगों के हाथ पीड़ित के कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस लग जाता था। इसके बाद बैंकिंग एप और इंटरनेट बैंकिंग तक पहुंच बनाने का खेल शुरू होता था।

जापानी भाषा सीखी और शुरू कर दिया ठगी का कारोबार

पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि उन्होंने नालंदा और गया में जापानी भाषा सीखी थी। इसी भाषा में जापान के नागरिकों से बातचीत कर उनका भरोसा जीता जाता था। ठग विदेशी नामों का इस्तेमाल करते थे और विश्वास बढ़ाने के लिए कंप्यूटर स्क्रीन पर फर्जी पहचान पत्र तक दिखाते थे।

कॉल VoIP के जरिए की जाती थी। पीड़ित को जापान का +81 नंबर दिखाई देता था, जबकि फोन भारत में बैठे ठग कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, गिरोह कुछ ही मिनट में नया शिकार तलाश लेता था।

मदद के नाम पर कैमरा ऑन, स्क्रीन पर पूरा नियंत्रण

साइबर ठग केवल कंप्यूटर तक ही सीमित नहीं रहते थे। रिमोट एक्सेस के दौरान पीड़ितों से वेबकैम तक चालू कराया जाता था। पुलिस के मुताबिक, बरामद इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों में कई बुजुर्ग कैमरे के सामने दिखाई दे रहे हैं। कुछ ने अपने मोबाइल की स्क्रीन तक कैमरे की ओर कर रखी थी।

पीड़ित को लगता था कि सामने वाला कर्मचारी उसके कंप्यूटर की समस्या दूर कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ बैठा ठग उसकी स्क्रीन पर होने वाली गतिविधियों को नियंत्रित कर रहा था।

बैंकिंग जानकारी व्हाट्सएप ग्रुप में पहुंचती थी

पुलिस के अनुसार, पीड़ितों से हासिल बैंकिंग संबंधी जानकारी गिरोह के व्हाट्सएप ग्रुपों में साझा की जाती थी। इसके बाद म्यूल बैंक खातों में रकम भेजी जाती थी। गिरफ्तार आरोपी रौनक सिंह के दो बैंक खातों में मिले करीब नौ लाख रुपये पुलिस ने फ्रीज करा दिए हैं।

19 मॉनिटर, 20 सीपीयू… देखकर पुलिस भी रह गई हैरान

कॉल सेंटर से 19 मॉनिटर, 20 सीपीयू, 19 की-बोर्ड, 18 माउस और 18 हेडफोन बरामद हुए हैं। तीन लैपटॉप, छह मोबाइल फोन, तीन वाई-फाई राउटर, टीपी-लिंक राउटर और डी-लिंक स्विच हब भी मिला है। इसके अलावा वाराणसी के पते पर बने पांच कूटरचित आधार कार्ड बरामद किए गए हैं।

दबिश से पहले निकल गया कथित सरगना

पुलिस की कार्रवाई से कुछ देर पहले ही कॉल सेंटर का कथित मुख्य संचालक मौके से निकल गया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि जापानी करेंसी को हवाला के जरिए भारतीय रुपये में बदलकर कॉल सेंटर का संचालन किया जाता था। पुलिस अब फरार संचालक और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है।

पांच गिरफ्तार, तीन अन्य नामजद

गिरफ्तार आरोपियों में रौनक सिंह (32), रोशन कुमार (21), अमन कुमार (23), अंकित कुमार (25) और विकास वैभव (25), सभी बिहार निवासी हैं। पुलिस ने तीन अन्य लोगों को भी नामजद किया है।

मुगलसराय थाने में मुकदमा अपराध संख्या 510/2026 के तहत बीएनएस की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 66सी व 66डी में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस बरामद कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच करा रही है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया और कितनी रकम की ठगी की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *