रायपुर, : हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (HNLU), रायपुर में “टेक्स्ट, कॉन्टेक्स्ट एंड इंटरप्रिटेशन: नेविगेटिंग लॉ एंड लिटरेचर इन द कंटेम्पररी ग्लोबल लैंडस्केप” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक समापन हुआ। सम्मेलन का आयोजन स्कूल ऑफ लॉ एंड ह्यूमैनिटीज तथा सेंटर फॉर लॉ एंड लैंग्वेज द्वारा 29–30 अगस्त 2026 को किया गया।
स्कूल ऑफ लॉ एंड ह्यूमैनिटीज के अंतर्गत सेंटर फॉर लॉ एंड लैंग्वेज द्वारा परिकल्पित इस सम्मेलन में शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया। सम्मेलन में इस बात पर विमर्श किया गया कि कानून और साहित्य किस प्रकार न्याय, गरिमा, पहचान, सत्ता और मानवीय अनुभव से जुड़े प्रश्नों को समझने में एक-दूसरे को समृद्ध करते हैं। चर्चा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि कानूनी और साहित्यिक ग्रंथों को उस सामाजिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ से अलग करके नहीं समझा जा सकता, जिसमें उनका निर्माण, पठन और व्याख्या होती है।
सम्मेलन के दौरान संवैधानिकता और मानवाधिकार, जेंडर एवं क्वियर परिप्रेक्ष्य, जाति और पहचान, भाषा और राजनीति, स्मृति और आघात, पर्यावरणीय न्याय, युद्ध संबंधी आख्यान, डिजिटल संवैधानिकता तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे समकालीन विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। विभिन्न सत्रों में विषयों की सीमाओं से आगे बढ़कर साहित्य के माध्यम से कानून और कानून के माध्यम से साहित्य को समझने का प्रयास किया गया।
कानून और साहित्य के बीच तीन महत्वपूर्ण संबंध
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र ने पूरे आयोजन के बौद्धिक आधार को स्पष्ट किया। अपने उद्घाटन वक्तव्य में HNLU के कुलपति प्रो. वी. सी. विवेकानंदन ने कानून और साहित्य के बीच तीन महत्वपूर्ण संबंधों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि कानून अंततः विभिन्न और परस्पर प्रतिस्पर्धी आख्यानों के माध्यम से आकार लेता है; इंटरप्रिटेशन अर्थात व्याख्या, न्यायाधीश और साहित्य के पाठक — दोनों के लिए साझा क्षेत्र है; और साहित्य कानून की अमूर्त अवधारणाओं को मानवीय चेहरा और आवाज देकर उन्हें अधिक मानवीय बनाता है।
सम्मेलन के समापन सत्र में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कानून और साहित्य के संबंध को संक्षेप में व्यक्त करते हुए कहा:
“द लॉ गिव्स सोसाइटी इट्स रूल्स; लिटरेचर गिव्स सोसाइटी इट्स मेमोरी, इट्स इमैजिनेशन एंड इट्स कॉन्शियंस।”
अर्थात, कानून समाज को उसके नियम देता है, जबकि साहित्य समाज को उसकी स्मृति, कल्पना और अंतरात्मा प्रदान करता है।
कानून को जीवन और अनुभव के संदर्भ में समझने की आवश्यकता
उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में तेलंगाना हाई कोर्ट के सीनियर काउंसिल एवं HNLU के डिस्टिंग्विश्ड ज्यूरिस्ट प्रोफेसर एल. रविचंदर ने कानून और साहित्य के विभिन्न आयामों को प्रभावी ढंग से जोड़ा। उन्होंने कानून को जीवन और मानवीय अनुभव के संदर्भ में समझने के महत्व पर जोर दिया तथा शोधकर्ताओं और विधि-व्यवसाय से जुड़े लोगों से आग्रह किया कि वे केवल टेक्स्ट तक सीमित न रहें, बल्कि कानून की अंतर्निहित धारणाओं, उसके संदर्भ और उसके परिणामों पर निरंतर प्रश्न उठाते रहें।
साहित्य कानून को मानवीय दृष्टि प्रदान करता है
समापन सत्र में IIULER गोवा के कुलपति एवं HNLU के डिस्टिंग्विश्ड ज्यूरिस्ट प्रोफेसर प्रो. (डॉ.) आर. वेंकट राव ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। उन्होंने न्यायमूर्ति हिदायतुल्लाह की जीवनी “माय ओन बॉसवेल: मेमॉयर्स” को HNLU में आयोजित इस सम्मेलन के विषय के साथ एक उपयुक्त संबंध के रूप में रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि कानून को केवल उसके टेक्स्ट के आधार पर नहीं, बल्कि कॉन्टेक्स्ट, साहित्य, इतिहास और मानवीय अनुभव के माध्यम से भी समझना आवश्यक है। सैमुअल जॉनसन, शेक्सपियर और काफ्का के साहित्यिक संदर्भों तथा विभिन्न न्यायिक उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने बताया कि साहित्य विधि-व्यवसाय से जुड़े लोगों में सहानुभूति, चरित्र और करुणा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संभावित अमानवीय प्रभावों के प्रति भी आगाह किया और मानवीय मूल्यों को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि साहित्य कानून का स्थान नहीं ले सकता, लेकिन उसे गहराई से समृद्ध और पूरक अवश्य बना सकता है।
125 एब्स्ट्रैक्ट, 80 शोधपत्र और 15 तकनीकी सत्र
सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर बुक ऑफ एब्स्ट्रैक्ट्स का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर स्कूल ऑफ लॉ एंड ह्यूमैनिटीज के निदेशक डॉ. अविनाश सामल ने स्वागत भाषण दिया, जबकि श्री आशुतोष अहिरे ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
समापन सत्र में सम्मेलन की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए प्रदीप बर्मन ने बताया कि सम्मेलन के लिए कुल 125 एब्स्ट्रैक्ट्स प्राप्त हुए, जिनमें से 80 शोधपत्र 15 तकनीकी सत्रों में प्रस्तुत किए गए।
दूसरे दिन के समापन सत्र में HNLU के प्रभारी कुलसचिव डॉ. दीपक श्रीवास्तव ने स्वागत वक्तव्य दिया। वहीं डॉ. जीवन सागर, प्रमुख, हेड, सेंटर फॉर लॉ एंड लैंग्वेज ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और इस अकादमिक रूप से समृद्ध सम्मेलन को सार्थक समापन तक पहुँचाया।
सम्मेलन को डिजिटल माध्यम से सुचारु और प्रभावी ढंग से आयोजित करने में 22 छात्र वालंटियर्स की भूमिका भी उल्लेखनीय रही। शुभांशु दुबे के नेतृत्व में छात्र वालंटियर्स ने पूरे सम्मेलन के तकनीकी एवं आयोजन संबंधी पक्षों को प्रभावी ढंग से संभाला, जिसके परिणामस्वरूप सम्मेलन का वर्चुअल संचालन व्यवस्थित और निर्बाध रहा। दो दिवसीय सम्मेलन ने लॉ और लिटरेचर के बीच अंतर्विषयी संवाद को नई दिशा देते हुए यह रेखांकित किया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में कानून की समझ को मानवीय अनुभव, भाषा, संस्कृति, स्मृति और साहित्य से जोड़ना अधिक आवश्यक हो गया है।
HNLU में लॉ, लिटरेचर और इंटरप्रिटेशन पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न
