प्रयागराज । “अवसर जब सीमाओं से आगे बढ़कर क्षमताओं को पहचानता है, तो आत्मनिर्भरता की राह खुलती है।” इसी विचार को केंद्र में रखते हुए उत्तर मध्य रेलवे द्वारा दिव्यांगजन सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री “सुगम्यता से आत्मनिर्भरता तक – उत्तर मध्य रेलवे की दिव्यांगजन सशक्तिकरण यात्रा” का उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय, प्रयागराज में महाप्रबंधक, उत्तर मध्य रेलवे, नरेश पाल सिंह ने अनावरण किया। इस डॉक्यूमेंट्री का निर्माण उत्तर मध्य रेलवे के जनसम्पर्क विभाग द्वारा किया गया है।
यह डॉक्यूमेंट्री केवल सुविधाओं और आंकड़ों का प्रस्तुतीकरण नहीं है, बल्कि उन सपनों, संघर्षों और अवसरों की कहानी है, जिन्होंने अनेक दिव्यांगजनों के जीवन को नई दिशा दी। यह दिखाती है कि जब व्यवस्था व्यक्ति की सीमाओं के बजाय उसकी क्षमताओं को देखती है, तो रोजगार केवल आय का साधन नहीं रहता, बल्कि सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन जाता है।
उत्तर मध्य रेलवे के विभिन्न विभागों एवं इकाइयों में कार्यरत 8,256 संविदा कार्मिकों में लगभग 500 दिव्यांगजन विभिन्न यात्री सेवा एवं परिचालन संबंधी भूमिकाओं में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें ATVM फैसिलिटेटर, स्टेशन उद्घोषक, डेटा एंट्री ऑपरेटर, पूछताछ सहायक तथा ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ (OSOP) स्टॉल संचालक जैसी भूमिकाएं शामिल हैं। वहीं, उत्तर मध्य रेलवे के नियमित कैडर में 784 दिव्यांग कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें 15 दिव्यांग कर्मचारियों की नियुक्ति वर्ष 2025-26 के दौरान की गई है। यह आंकड़े केवल रोजगार के अवसरों को नहीं दर्शाते, बल्कि एक ऐसे कार्यस्थल की ओर बढ़ते कदम हैं, जहां क्षमता को अवसर और मेहनत को सम्मान मिलता है। भविष्य की संभावनाओं को मजबूत करने के लिए कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 100 दिव्यांग युवा एक्ट अप्रेंटिस के रूप में कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, ताकि उनके लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए रास्ते तैयार हो सकें।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण के लिए रोजगार के साथ-साथ सुगम अधोसंरचना पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। रैम्प, लिफ्ट, सुलभ पार्किंग, टिकट काउंटर, ब्रेल संकेतक, व्हीलचेयर और बैटरी चालित वाहनों जैसी सुविधाएं दिव्यांग यात्रियों और कर्मचारियों के लिए अधिक सुगम एवं सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करने में सहायक हैं।
महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के मार्गदर्शन में उत्तर मध्य रेलवे द्वारा दिव्यांगजन सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे ये प्रयास “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” की भावना को कार्यरूप देते हैं। इस अवसर पर उत्तर मध्य रेलवे के सभी प्रधान विभागाध्यक्ष (PHODs), मंडल रेल प्रबंधक – प्रयागराज, झाँसी एवं आगरा मंडल तथा अन्य वरिष्ठ मंडलीय अधिकारी उपस्थित रहे।
यह डॉक्यूमेंट्री सुगम्य भारत अभियान की भावना के अनुरूप उत्तर मध्य रेलवे की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसमें सुगम्यता को केवल सुविधा नहीं, बल्कि समान अवसर और आत्मनिर्भरता का माध्यम माना गया है।
