बालिका सशक्तिकरण अभियान 2026 के अंतर्गत एनटीपीसी कोरबा द्वारा दो दिवसीय अंतरिक्ष विज्ञान कार्यशाला का आयोजन

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“आज की जेम बालिका, कल की राष्ट्र-निर्माता

कोरबा, : एनटीपीसी कोरबा ने अपने प्रमुख कार्यक्रम बालिका सशक्तिकरण अभियान (जेम) 2026 के अंतर्गत दो दिवसीय प्रेरक व्यक्तित्व कार्यक्रम एवं अंतरिक्ष विज्ञान कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया, जिससे युवा बालिकाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास एवं आकांक्षाओं के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया। इस कार्यक्रम का आयोजन इग्नाइटिंग ड्रीम्स ऑफ यंग माइंड्स (IDYM) फाउंडेशन के सहयोग से किया गया, जो छात्रों के बीच अंतरिक्ष शिक्षा एवं नवाचार को बढ़ावा देने हेतु इसरो (ISRO)-पंजीकृत अंतरिक्ष ट्यूटर संगठन है। “प्रेरित हों • सीखें • नेतृत्व करें • उपलब्धि प्राप्त करें” विषय पर आधारित इस कार्यशाला ने प्रतिभागियों को अंतरिक्ष विज्ञान में अनुभवात्मक शिक्षण के अवसर प्रदान किए तथा उन्हें भारत के अंतरिक्ष एवं रक्षा क्षेत्रों की प्रतिष्ठित उपलब्धि प्राप्त हस्तियों के साथ संवाद का अवसर भी दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ 5 जून को अंतरिक्ष विज्ञान एवं रॉकेट विज्ञान पर एक रोचक सत्र के साथ हुआ, जिसमें IDYM फाउंडेशन के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को अंतरिक्ष, उपग्रह प्रौद्योगिकी, प्रक्षेपण यानों तथा रॉकेट प्रणोदन प्रणालियों की आकर्षक दुनिया से परिचित कराया। विशेष रूप से तैयार की गई स्पेस प्रदर्शनी ने बालिकाओं को उपग्रहों, प्रक्षेपण यानों तथा भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बारे में जानने हेतु एक संवादात्मक मंच प्रदान किया। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण वॉटर रॉकेट चैलेंज रहा, जिसमें प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में जल रॉकेटों का डिजाइन तैयार किया, उनका निर्माण किया तथा उन्हें प्रक्षेपित किया। इस गतिविधि के माध्यम से बालिकाओं ने थ्रस्ट, दाब, एयरोडायनेमिक्स तथा उड़ान स्थिरता जैसे वैज्ञानिक सिद्धांतों की व्यवहारिक समझ प्राप्त की। प्रतिभागियों को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की वैज्ञानिक श्रीमती अंजू दामोदरन के साथ संवाद करने का अवसर प्राप्त हुआ।

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में 28 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, वे वर्तमान में यू. आर. राव सैटेलाइट सेंटर (URSC), बेंगलुरु में उपग्रह एकीकरण की उप परियोजना निदेशक तथा विद्युत एकीकरण अनुभाग-II की प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं गणित (STEM) के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए बालिकाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा: “विज्ञान का कोई लिंग नहीं होता। जिज्ञासा, कठिन परिश्रम और दृढ़ता आपको एक कक्षा से सितारों तक पहुँचा सकती है।”

कार्यक्रम का एक अन्य प्रमुख आकर्षण एक्सिओम मिशन-4 के अंतरिक्ष यात्री पायलट तथा भारतीय वायुसेना अधिकारी ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, एसी के साथ प्रेरणादायी संवाद सत्र रहा।उन्होंने विमानन एवं अंतरिक्ष अन्वेषण में अपने विशिष्ट करियर के अनुभव साझा करते हुए अनुशासन, साहस, धैर्य एवं नेतृत्व के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बालिकाओं को प्रेरित करते हुए कहा:“अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखें। आकाश की कोई सीमा नहीं है—स्वयं अंतरिक्ष उन लोगों की प्रतीक्षा कर रहा है जो सपने देखने का साहस रखते हैं।” दूसरे दिन प्रतिभागियों ने मॉडल रॉकेट्री कार्यशाला में भाग लिया, जिसमें उन्होंने विशेषज्ञों की देखरेख में मॉडल रॉकेटों का डिजाइन तैयार किया तथा उनका निर्माण किया।

कार्यशाला का समापन एनटीपीसी कोरबा के व्यवसाय इकाई प्रमुख किशोर चंद्र पात्र की गरिमामयी उपस्थिति में रॉकेटों के सफल प्रक्षेपण के साथ हुआ।इस कार्यशाला ने युवा बालिकाओं को वैज्ञानिक शिक्षा, नवाचार तथा सफल पेशेवरों के साथ संवाद के अवसर प्रदान करने के परिवर्तनकारी प्रभाव को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया।कार्यक्रम ने आत्मविश्वास, नवाचार, संचार, नेतृत्व तथा धैर्य जैसे प्रमुख मूल्यों को सुदृढ़ किया तथा बालिकाओं को रूढ़िवादी धारणाओं को चुनौती देने, उच्च शिक्षा प्राप्त करने तथा समाज एवं राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों द्वारा जेम प्रतिज्ञा लेने के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने बड़े सपने देखने, निरंतर सीखने, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने तथा समाज एवं राष्ट्र के प्रति सकारात्मक योगदान देने का संकल्प लिया।

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