पारंपरिक कला से सतत आजीविका तक: सेल, राउरकेला द्वारा शिल्प-आधारित कौशल विकास के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण

Spread the love

राउरकेला। सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण को एक साथ आगे बढ़ाते हुए, शिल्प-आधारित कौशल विकास की अनेक पहलें कीं। अपने निगमित  सामाजिक दायित्व (सीएसआर) कार्यक्रमों के माध्यम से आरएसपी ने ग्रामीण महिलाओं को पारंपरिक कला एवं हस्तशिल्प का प्रशिक्षण प्रदान कर उनकी पारंपरिक दक्षताओं को सतत आजीविका के अवसरों में परिवर्तित करने का प्रयास किया।

इसी क्रम में लिंड्रा, बिसरा, झिरपानी पुनर्वास कॉलोनी तथा जॉल्डा पुनर्वास  कॉलोनी की महिलाओं के लिए 30 दिवसीय बांस शिल्प प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। आरएसपी के सीएसआर विभाग द्वारा राँची की संस्था मेस्सर्स एनरीड एवं निर्माण के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को बांस शिल्प से संबंधित व्यावहारिक कौशल प्रदान किए गए। प्रशिक्षण में माप-निर्धारण तकनीक, फ्री-हैंड ड्राइंग, बांस का उपचार एवं संरक्षण तथा विभिन्न डिजाइनों की टोकरियाँ और बिन बनाने की विधियाँ शामिल थीं। प्रशिक्षण के उपरांत त्वरित आर्थिक लाभ सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक प्रशिक्षित शिल्पकार को 50 बांस की टोकरियों के निर्माण का कार्यादेश प्रदान किया गया, जिनका विपणन भागीदार संस्था द्वारा किया गया। इससे प्रशिक्षण के बाद महिलाओं के लिए आय का एक सुनिश्चित स्रोत उपलब्ध हुआ।

ओडिशा की समृद्ध कलात्मक विरासत के संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए आरएसपी ने 1 नवंबर, 2025 से सुईडीही गांव में पट्टचित्र प्रशिक्षण कार्यक्रम भी प्रारंभ किया। लगभग 12.58 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना से वर्तमान में 12 महिला प्रतिभागी लाभान्वित हो रही हैं। कुशल कलाकारों द्वारा दिए जा रहे व्यवस्थित प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएँ इस प्रसिद्ध पारंपरिक कला की जटिल तकनीकों को सीख रही हैं, जिससे वे बाजारोन्मुख उत्पाद तैयार करने के साथ-साथ सदियों पुरानी सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित कर रही हैं।

रचनात्मक कलाओं के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को एक नया आयाम प्रदान करते हुए आरएसपी ने रांची स्थित लीड्स संस्था के सहयोग से कांथा सिलाई  एवं फैब्रिक पेंटिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम को भी प्रोत्साहित किया। इस कार्यक्रम से नुआगाँव की गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) वर्ग की 20 वंचित महिलाएँ लाभान्वित हो रही हैं। प्रतिभागियों को कांथा स्टिचिंग एवं फैब्रिक पेंटिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे चित्रांकित परिधान, गृह सज्जा सामग्री तथा फैशन एक्सेसरीज़ जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार कर सकें। कार्यक्रम की एक विशेषता यह है कि प्रशिक्षण के तीसरे माह से ही प्रशिक्षुओं द्वारा तैयार उत्पादों को विपणन केंद्रों से जोड़ा जाता है, जिससे आय अर्जित करने का प्रत्यक्ष अवसर सुनिश्चित होता है। पारंपरिक शिल्प कलाओं को बढ़ावा देकर तथा उन्हें आधुनिक बाजार की संभावनाओं से जोड़कर सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र सांस्कृतिक संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और सतत आजीविका सृजन के सफल समन्वय की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *